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सीडीपीओ कुल्लू समेत निजी कंपनी के प्रबंधक पर धोखाधड़ी का मुकदमा

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- फोटो : demo
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मंडी। सरकारी मीटिंग में निजी फाइनेंस कंपनी के प्रबंधक को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से रूबरू करवाकर आरडी खुलवाने और बाद में पैसा देने से मुकरने के आरोपों के तहत पुलिस ने सीडीपीओ और कंपनी प्रबंधक के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। मामला 2013 का है। वर्तमान में अधिकारी कुल्लू में सीडीपीओ के पद पर तैनात है। धोखाधड़ी का शिकार सात आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हुई हैं। करीब तीन लाख की धोखाधड़ी का मामला बताया जा रहा है। सीडीपीओ समेत निजी फाइनेंस कंपनी के खिलाफ भादंसं की धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि एसपी मंडी अशोक कुमार ने की है।
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पुलिस थाना बल्ह जिला मंडी में शिकायतकर्ता शकुंतला देवी पत्नी पाल सिंह निवासी बरसु तहसील बल्ह जिला मंडी की शिकायत पर केस दर्ज हुआ है। कहा कि वह 1986 से बतौर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बरसु में कार्य करती हैं। वर्ष 2013 में सीडीपीओ इंद्र देव शर्मा ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए बैठक का आयोजन करवाया। बैठक में उन्होंने अपने रिश्तेदार रवि शर्मा आरसीएस फाइनेंस लिमिटेड कंपनी के मैनेजर से इनकी बातचीत करवाई। जिसने इन्हें बतलाया कि इस कंपनी में यह अपना आरडी खाता खुलवाएंगी तो तीन साल में पैसा डबल हो जाएगा। जिस उसने और वीना देवी, दयावंती, कृष्णा, कौशल्या, तेज कुमारी, सावित्री, कमलेश ने उपरोक्त कंपनी में खाता खुलवाया। जिसकी किश्त यह सभी वर्ष 2013 से 2015 तक देती रही। परंतु 2015 में इन्हें पता चला कि यह कंपनी फर्जी है, जिस पर इन्होंने अपने पैसे वापस करने की मांग की तो उन्हें पैसे देने से मना कर दिया। उपनिरीक्षक सुशील कुमार अन्वेष्णाधिकारी पुलिस थाना बल्ह इस मामले की छानबीन कर रहे हैं।

किसी से जबरन नहीं खुलाई आरडी
सीडीपीओ इंद्र देव शर्मा ने कहा कि आरडी खुलवाने के लिए उन्होंने किसी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को प्रेरित नहीं किया है। न ही जबरन आरडी खुलवाई है। किसने आरडी खुलवाई किसने नहीं उन्हें इस बाबत जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि फाइनेंस कंपनी का मैनेजर उनके पास आया था और आरडी खुलवाने के लिए कह रहा था। उसे कहा था कि अगर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मानती हैं तो आरडी खोल दो। इसके बाद किसने आरडी खोली और किसने किश्तें दी और किसका पैसा फंसा, उन्हें मालूम नहीं है।
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