बालीचौकी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाते हुए। स्त्रोत- संगठन
बालीचौकी (मंडी)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली के विरोध में सोमवार को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ने संयुक्त रूप से बालीचौकी में रैली निकालकर उनका पुतला जलाया। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग की।
माकपा और भाकपा नेताओं ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर गैरकानूनी तरीके से मतदाता सूची से करीब 13.50 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 10 माह से दो अन्य चुनाव आयुक्त भी मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मतदान के अधिकार के साथ शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार को भी कुचलने की कोशिश की जा रही है।
माकपा नेताओं ने बताया कि लोगों को जागरूक करने के लिए गांव-गांव और घर-घर अभियान चलाया गया है। रैली और प्रदर्शन को माकपा राज्य कमेटी सदस्य महेंद्र राणा, भाकपा जिला सचिव मेघ सिंह पालसरा, पीटीएफ के पूर्व बालीचौकी ब्लॉक प्रधान अमरजीत सिंह और रूप सिंह ने संबोधित किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा की।