मंडी/सरकाघाट। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सरकाघाट डॉ. अबीरा वासू की अदालत ने हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी दंपती तारा चंद और प्रमिला देवी को आईपीसी की धारा 307 के तहत दोषी करार देते हुए 10 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों को 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर एक महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतने का आदेश दिया गया है।
उप जिला न्यायवादी राजीव शर्मा ने बताया कि नौ सितंबर 2018 को स्नेहा चंदेल ने पुलिस चौकी में सूचना दी कि उसके ताया तारा चंद और ताई प्रमिला देवी ने उसके पिता प्रकाश चंद के साथ मारपीट की और उन्हें कमरे में बंद कर दिया। प्रकाश चंद भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया और जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ चालान कोर्ट में दायर किया।
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने 18 गवाहों के बयान और साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए। गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तारा चंद और प्रमिला देवी को दोषी ठहराया और उन्हें सजा सुनाई। अदालत ने आईपीसी की धारा 325 के तहत सात वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न अदा करने पर 15 दिन का अतिरिक्त कारावास होगा। आईपीसी की धारा 323 के तहत एक वर्ष का कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा भी दी गई।
जुर्माना न अदा करने पर 10 दिन का अतिरिक्त कारावास होगा। आईपीसी की धारा 342 के तहत एक वर्ष का कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। आईपीसी की धारा 504 के तहत एक महीने का कठोर कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा भी दी गई। वहीं, आईपीसी की धारा 506 के तहत एक वर्ष का कठोर कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना न अदा करने पर पांच दिन का अतिरिक्त कारावास होगा।
पीलीभीत के जिला चिकित्सालय में मरीज देखते चिकित्सक।संवाद- फोटो : संवाद
पीलीभीत के जिला चिकित्सालय में मरीज देखते चिकित्सक।संवाद- फोटो : संवाद