तत्तापानी क्षेत्र में प्राकृतिक गुफा में शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा करते हुए। स्त्रोत- जागरूक प
करसोग (मंडी)। महाशिवरात्रि सप्ताह के दौरान सतलुज तट पर स्थित तत्तापानी क्षेत्र में प्राकृतिक गुफा में विधिवत शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की गई है। सरौर संगम क्षेत्र के समीप पाई गई इस गुफा में धार्मिक अनुष्ठान के साथ शिव स्थापना होने से श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है।
सतलुज घाटी के अंतर्गत पूर्ववर्ती सुकेत रियासत का तत्तापानी क्षेत्र प्राचीन काल से ऋषि परंपरा की तपोभूमि माना जाता रहा है। मान्यता के अनुसार ऋषि जमदग्नि सिरमौर की गिरिघाटी से यहां आए और इस क्षेत्र में आर्य संस्कृति का प्रसार किया। पांगणा सरिता और सतलुज नदी के संगम स्थल सरौर में स्थित प्राचीन गुफा सैकड़ों स्वयंभू शिवलिंगों के लिए प्रसिद्ध है। कोल बांध के निर्माण के बाद यह प्राचीन गुफा अधिकांश समय जलमग्न रहती है।
शीत ऋतु में सतलुज का जलस्तर कम होने से स्थानीय होटल व्यवसायी प्रेम रैणा ने स्टीमर के माध्यम से श्रद्धालुओं को गुफा तक पहुंचाकर दर्शन की व्यवस्था की। सरौर गुफा के समीप पांगणा सरिता के दाहिनी ओर एक और विशाल प्राकृतिक गुफा की खोज की गई, जो आकार में पूर्ववर्ती गुफा से बड़ी बताई जा रही है। इस नव-आविष्कृत गुफा में ठियोग (शिमला) के भागवत वक्ता डॉ. दास महेश व्यास द्वारा विधिवत मंत्रोच्चार के साथ शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा करवाई गई। बताया जा रहा है कि जलस्तर बढ़ने पर यह नई गुफा भी जलमग्न हो जाएगी।