मंडी। ऊहल तीन जल विद्युत परियोजना के चालू होने के बाद मच्छयाल स्थित महाशीर मत्स्य पालन फार्म पर संकट के बादल मंडरा गए हैं। ऊहल परियोजना के चलते रणा खड्ड और नेरी खड्ड के जल स्तर में अत्यधिक गिरावट आई है। ये दोनों खड्ड राष्ट्रीय महाशीर मत्स्य पालन फार्म मच्छयाल की प्रमुख जल स्रोत हैं। वर्तमान में इन स्रोतों से जल की आपूर्ति बाधित हो चुकी है और फार्म अब केवल बोरवेल के जल पर निर्भर है। इस संबंध में एक पत्र सहायक निदेशक मत्स्य पालन ने अतिरिक्त उपायुक्त को सौंपा है।
पत्र में बताया गया है कि महाशीर मछली की प्रजाति संकटग्रस्त श्रेणी में सूचीबद्ध है। इस प्रजाति के संरक्षण के लिए सरकार की ओर से महाशीर मत्स्य पालन फार्म की स्थापना की गई थी। इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति भी हुई है, लेकिन वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक है क्योंकि रणा और नेरी खड्ड से जल आपूर्ति पूरी तरह बंद हो चुकी है।
पत्र में जिक्र किया गया है कि ब्यास वैली पावर कॉरपोरेशन की ओर से परियोजना से पर्याप्त मात्रा में जल नहीं छोड़ा जा रहा है। ऊहल नदी का पूर्ण जल भी प्रोजेक्ट की ओर से उपयोग किया जा रहा है। स्थल निरीक्षण के दौरान पाया गया कि स्थल पर जल प्रवाह मापने के लिए कोई यंत्र स्थापित नहीं है। साथ ही फिश लैंडर का निर्माण कार्य भी अब तक अधूरा है।
इससे महाशीर मछलियों के प्राकृतिक प्रवासन में बाधा उत्पन्न हो रही है। इसकी जानकारी परियोजना प्रबंधन को भी दी गई है। प्रबंधन को रणा और नेरी खड्ड में अधिकतम संभव जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। उधर, मत्स्य पालन विभाग की सहायक निदेशक नीतू सिंह ने बताया कि परियोजना प्रबंधन को उचित मात्रा में पानी छोड़ने के लिए कहा गया है। मामला प्रशासन के ध्यान में लाया गया है। फिलहाल यह फार्म बोरवेल से ही चलाया जा रहा है।
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अतिरिक्त उपायुक्त का वर्जन