मंडी। मौसम में बदलाव होने से मंडी जिले में 1 से 5 साल तक के छोटे बच्चों को हाइपर रिएक्टिव एयरवे डिजीज (एचआरएडी) ने जकड़ लिया है। मातृ-शिशु अस्पताल मंडी में पिछले कुछ दिनों से इस रोग से ग्रसित करीब 15 मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। यह एक संक्रमण रोग है, इसमें रोगी की छाती जाम के साथ जुकाम होना, घरघराहट की आवाज आना, खांसी, बुखार और ठंड लगती है। समय पर उपचार न मिलने से रोगी की जान भी जा सकती है।
चिकित्सकों के अनुसार यह रोग तब होता है जब उत्तेजक पदार्थ ब्रोन्कियल नलियों यानी फेफड़ों के भीतर का वह वायुमार्ग जो श्वासनली से हवा को फेफड़ों के अंदर ले जाता है और यह फेफड़ों में विभाजित होती है, को प्रभावित करती है। इस रोग के लक्षण अस्थमा जैसे होते हैं। आमतौर पर यह रोग 5 साल से कम आयु के बच्चों में होता है। बड़ी आयु वालों में कम होता है।
मातृ-शिशु अस्पताल में उपचार ले रहे मराथु निवासी भरत कुमार, सौली खड्ड से अंशुल, देवधार मंडी से उत्तम चंद शर्मा, जवाहर नगर मंडी से राधिका सहित अन्य परिजनों ने बताया कि उनके 5 साल तक के बच्चों को दो दिन से तेज बुखार, जुकाम और खांसी की शिकायत होने पर अस्पताल लाए थे। चिकित्सक ने जांच के बाद बच्चों को वार्डों में भर्ती कर दवाई के साथ नियमित तौर पर स्टीम देने और बच्चों को सर्दी से बचाने के सुझाव दिए हैं। उपचार मिलने के बाद से अभी बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार देखा गया है।
हाइपर रिएक्टिव एयरवे डिजीज होने पर बच्चों को तेज बुखार के साथ सर्दी लगना, खांसी के साथ जुकाम और छाती जाम होने से सांस लेने में कठिनाई होती है। ऐसे में समय न गंवाते हुए बच्चों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में उपचार दिलाना चाहिए। एमसीएच मंडी में अभी इस रोग से पीड़ित करीब 15 रोगियों को उपचार दिया जा रहा है।
-डॉ. आशुतोष, बाल रोग विशेषज्ञ एमसीएच मंडी
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कैसे करें बचाव
हाइपर रिएक्टिव एयरवे डिजीज (एचआरएडी) रोग होने पर बच्चों को धुएं से दूर रखें और ठंडी हवा न लगने दें। गर्म तरल पदार्थों का सेवन करवाएं। रोगी के कमरे को गर्म रखें। रोगी को अस्पताल में जांच के लिए जल्द पहुंचाए।