मंडी। चेक बाउंस के मामले में अपीलीय अदालत ने अधीनस्थ न्यायालय की सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील को निरस्त करने का फैसला सुनाया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एक) की अपीलीय अदालत ने चच्योट तहसील के वाहधार (गोहर) निवासी हरी राम पुत्र खूब राम की अपील को खारिज करते हुए अधीनस्थ न्यायालय द्वारा सुनाए गए सजा के फैसले को बरकरार रखा।
अधीनस्थ न्यायालय ने नौण (कोट) गांव निवासी सोहन लाल पुत्र भादरू राम की शिकायत पर दोषी हरी राम के खिलाफ चलाए अभियोग के साबित होने पर उसे 6 माह के साधारण कारावास और 80,000 रुपये हर्जाने का फैसला सुनाया था। शिकायतकर्ता ने अधीनस्थ न्यायालय में निगोशिएबल इन्स्ट्रुमेंट अधिनियम की धारा 138 के तहत शिकायत दायर कर आरोपी पर अभियोग चलाया था।
इसमें शिकायतकर्ता का कहना था कि दोषी ने उनसे घरेलू जरूरतों के लिए 15 मार्च 2016 को साठ हजार रुपये की राशि उधार ली थी। इस देनदारी को चुकाने के लिए आरोपी ने शिकायतकर्ता को साठ हजार रुपये का एक चेक जारी किया था। शिकायतकर्ता ने चेक को भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत किया। लेकिन चेक बाउंस हो गया। इस पर शिकायतकर्ता ने दोषी को कानूनी नोटिस दिया था। इसके बावजूद दसने राशि अदा नहीं की।
अधीनस्थ न्यायालय ने शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर चेक बाउंस का अपराध साबित होने पर आरोपी को सजा का फैसला सुनाया था। दोषी ने अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को अपीलीय न्यायालय में चुनौती दी थी। अपीलीय अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अधीनस्थ न्यायालय के निर्णय सही मानते हुए आरोपी को सुनाई गई उक्त सजा और हर्जाना अदा करने के फैसला बरकरार रखते हुए उसकी अपील को निरस्त करने का फैसला दिया है।