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हिमाचल: बुजुर्गों के गिरते ही परिजनों को अलर्ट करेगी सेंसर वाली जैकेट, छात्रों ने हैकाथॉन में जीता पहला स्थान

Sun, 18 Oct 2026 11:30 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।

सार

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर के विद्यार्थियों ने बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए सेंसर वाली स्मार्ट जैकेट तैयार की है। शरीर का संतुलन बिगड़ने या गिरने की स्थिति में यह परिजनों को आपातकालीन सूचना भेजने के लिए बनाई गई है। 

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जैकेट और जेएनजीईसी सुंदरनगर के विद्यार्थियों का बनाया मॉडल। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में बुजुर्गों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। बिलासपुर के विद्यार्थियों ने एक ऐसी सेंसर वाली स्मार्ट जैकेट तैयार की है, जो शरीर का संतुलन बिगड़ने या गिरने की स्थिति में परिजनों को आपातकालीन सूचना भेजने के लिए बनाई गई है। इस नवाचार को तीसरे राज्य स्तरीय स्मार्ट हैकाथॉन-2026 में पहला स्थान मिला है।

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जवाहरलाल नेहरू राजकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय (जेएनजीईसी), सुंदरनगर में आयोजित इस प्रतियोगिता में राजकीय हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज, बंदला की सिल्वर शील्ड टीम विजेता रही। कंप्यूटर विज्ञान के सहायक प्राध्यापक डॉ. रवि कुमार के मार्गदर्शन में तैयार की गई इस जैकेट से खासतौर पर उन ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों को समय पर सहायता पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां चिकित्सा सुविधाएं सीमित हैं।

विजेता टीम को 20 हजार रुपये और ट्रॉफी
स्मार्ट हैकाथॉन में पहला स्थान हासिल करने वाली सिल्वर शील्ड टीम को 20 हजार रुपये और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों का यह नवाचार बुजुर्गों की सुरक्षा से जुड़ी एक अहम समस्या का तकनीकी समाधान प्रस्तुत करता है।

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भांग के रेशों और फफूंद से बनाए पर्यावरण अनुकूल पैनल
मेजबान जेएनजीईसी सुंदरनगर की टेक्स चैंपियंस टीम दूसरे स्थान पर रही। डॉ. दिनेश भाटिया और प्रवीण कुमार के मार्गदर्शन में टीम ने भांग के रेशों और फफूंद के मायसीलियम से पर्यावरण अनुकूल मिश्रित पैनल तैयार किए। इन पैनलों में ध्वनि को अवशोषित करने की क्षमता है। इनका इस्तेमाल भवनों के आंतरिक निर्माण में किया जा सकता है। दूसरे स्थान पर रही टीम को 16 हजार रुपये और ट्रॉफी प्रदान की गई।

हिमनद झीलों की निगरानी और बाढ़ की चेतावनी का मॉडल
राजीव गांधी राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, नगरोटा बगवां की वोल्ट माइनर्स टीम तीसरे स्थान पर रही। डॉ. विक्की कुमार, डॉ. अंकित शर्मा और डॉ. आशीष शर्मा के मार्गदर्शन में टीम ने हिमनद झीलों की निगरानी और बाढ़ की चेतावनी के लिए सेंसर तथा संचार प्रणाली पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किया। इस नवाचार का उद्देश्य हिमनद झीलों से जुड़े संभावित खतरों पर निगरानी रखने और समय रहते चेतावनी देने की व्यवस्था विकसित करना है। तीसरे स्थान पर रही टीम को 12 हजार रुपये दिए गए।

निदेशक ने विजेता विद्यार्थियों को किया सम्मानित
जेएनजीईसी सुंदरनगर के निदेशक-सह-प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. राजीव खंडूजा ने विजेता टीमों को सम्मानित किया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बुजुर्गों की सुरक्षा, पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी जैसे विषयों पर तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए।
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