मंडी के सेरी चाननी की पौड़ियो पर बैठे बड़ा देव कमरूनाग के दर्शन करते श्रद्धालु। संवाद
मंडी। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के अंतिम दिन रविवार को बड़ादेव कमरुनाग टारना की पहाड़ी स्थित माता श्यामा काली मंदिर से मंडी शहर में उतर आए। सुबह करीब नौ बजे बड़ादेव कमरुनाग राज देवता माधो राय मंदिर पहुंचे। सर्व देवता समिति एवं जिला प्रशासन की ओर से बड़ादेव कमरुनाग को राज बेहड़े में नजराना और चादर भेंट की। इसके बाद भूतनाथ मंदिर तथा बाद ऐतिहासिक सेरी चानणी में विराजमान हुए। इस दौरान बड़ादेव के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। करीब एक घंटे तक लोगों को दर्शन देने के बाद बड़ादेव कमरुनाग रवाना हुए।
अब बड़ादेव कमरुनाग यजमानों के बुलावे पर उनके घरों में आतिथ्य स्वीकार करेंगे। देव कमरुनाग के गूर बोध राज ने बताया कि कमरुघाटी पहुंचने के लिए बड़ादेव को अभी 15 से 20 दिन का समय लग जाएगा। बड़ादेव कमरुनाग की विदाई के साथ ही महाशिवरात्रि में शामिल होने वाले सभी देवी-देवता अपने मूल स्थान के लिए रवाना हो गए। बड़ादेव कमरुनाग महाशिवरात्रि महोत्सव के दौरान मंडी की टारना माता मंदिर में विराजमान रहते हैं।
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देव आदि ब्रह्मा ने बांधी कार
उत्तरशाल टिहरी के आदि ब्रह्मा देव ने अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के अंतिम दिन रविवार को शहर की सुरक्षा के लिए कार बांधी। जौ के आटे को गुलाल की तरह हवा में उछाल कर बुरी आत्माओं के दूर रहने का आह्वान किया। सुरक्षा कार को लेकर ऐसा माना जाता है कि इससे मंडी शहर पर बुरी आत्माओं और आपदाओं का साया नहीं पड़ता है। महाशिवरात्रि के दौरान जनपद के कई देवी-देवता रियासत काल से ही अपनी भागीदारी निभाते आए हैं। इनमें उत्तरशाल के देवता आदि ब्रह्मा की भूमिका अहम मानी जाती है। देवता के गूर ने तलवार के साथ देवता का नृत्य भी किया।
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