एशियन गेम्स में भारत को कबड्डी का स्वर्ण पदक दिलाने वाली गोहर क्षेत्र के मलोट गांव की बेटी भावना ठाकुर प्रदेश सरकार की ओर से घोषित 33 लाख रुपये की पुरस्कार राशि से संतुष्ट नहीं हैं। भावना का कहना है कि स्वर्ण पदक जीतने के बावजूद कबड्डी खिलाड़ियों को अन्य खेलों के पदक विजेताओं की तुलना में कम पुरस्कार राशि मिल रही है। वह मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मुलाकात कर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगी।
उन्होंने हिमाचल की चारों कबड्डी खिलाड़ियों को एक-एक करोड़ रुपये देने के साथ खिलाड़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए सरकारी नौकरी देने की मांग की है। जापान में हुए एशियन गेम्स के रोमांचक फाइनल में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने ईरान को हराकर स्वर्ण पदक जीता। भावना ने कहा कि वह मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस मांग को प्रमुखता से रखेंगी। उन्होंने कहा कि आगामी प्रतियोगिताओं में वे और बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करेंगी।
प्रदेश सरकार ने नई खेल नीति के तहत भावना समेत अन्य हिमाचली पदक विजेताओं को 33-33 लाख रुपये देने की घोषणा की है। भावना ने कहा कि खिलाड़ियों के योगदान को देखते हुए पुरस्कार राशि बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने चारों कबड्डी खिलाड़ियों को एक-एक करोड़ रुपये देने की मांग रखी है। साथ ही खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकारी नौकरी देने की मांग भी उठाई है।
कड़ी मेहनत और संघर्ष से पाया मुकाम
भावना ने कहा कि एशियन गेम्स में कबड्डी प्रतियोगिता उनके अब तक के कॅरिअर का सबसे बड़ा मंच रहा। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने वर्षों तक कड़ी मेहनत और संघर्ष किया है। इस बार सभी टीमें पहले की अपेक्षा काफी मजबूत थीं। चीनी ताइपे और ईरान की टीमों ने भारतीय टीम को कड़ी चुनौती दी।
तालमेल, एकजुटता से मिली सफलता
भावना ने फाइनल मुकाबले में करीब 15 मिनट मैदान पर उतरकर टीम के लिए अहम अंक जुटाए। उन्होंने जीत का श्रेय पूरी टीम के आपसी तालमेल और एकजुट प्रदर्शन को दिया।
पुष्पा के नेतृत्व में जीत का लक्ष्य ही किया था तय
उन्होंने कहा कि कप्तान पुष्पा राणा के नेतृत्व में हिमाचल की चारों खिलाड़ियों का लक्ष्य स्वर्ण जीतना था। भावना ने कहा कि टीम ने एकजुट होकर खेला और इसका परिणाम स्वर्ण पदक के रूप में मिला।