नेरचौक (मंडी)। पिछले कई सालों से विवादों की भेंट चढ़ने वाले भंगरोटू नलवाड़ मेले में इस बार रस्म अदायगी भी नहीं हो पाएगी। मेले के आयोजन पर संशय बन हुआ है, क्योंकि आयोजनकर्ता, स्थानीय लोग, प्रशासन सभी अपने हाथ खींच रहे हैं। ऐसे में इस बार इस मेले के आयोजन पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं, मेला स्थल पर कोविड अस्पताल बनने के बाद इस बार भी आयोजन पर संशय है।
राजा जोगिंद्र सेन के शासनकाल में भंगरोटू नलवाड़ मेले की शुरूआत हुई थी। पहली बार मेले का शुभारंभ लक्ष्मण सिंह नेगी ने भंगरोटू मैदान में खूंटा गाड़ कर की थी। उस समय हिमाचल से ही नहीं अपितु पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के व्यापारी भी यहां व्यापार करने आते थे। इस नलवाड़ मेले में अच्छी नस्ल के पशुओं की खरीद के लिए व्यापारी यहां पहुंचते थे।
सन 1942 में जब मेला शुरू हुआ था तब लोग यहां से दूर-दूर से बैल खरीदने के लिए पहुंचते थे तथा अपने बैल यहां बचने के लिए भी आते थे। कुल मिलाकर लाखों का पशुओं का कारोबार इस मेले में होता था। इस मेले को नेरचौक व्यापार मंडल द्वारा 2014 में एक बार फिर जीवित किया गया। स्थानीय ग्राम देवता सत श्री देव बाला कामेश्वर और अन्य देवी देवताओं को भी बुलाना शुरू किया गया।
2017 में इस मेले को पांच दिवसीय बनाया गया और मेले में दो दर्जन के करीब देवी-देवताओं को बुलाया गया। मगर इसके बाद फिर से यह मेला विवादों में भी रहा और आज इस पर संकट के बादल मंडरा गए हैं। उधर, एसडीएम बल्ह विशाल शर्मा ने बताया कि मेले के लिए जगह नहीं है। एक छोटे से स्थान पर मेले का आयोजन करने की बात की जा रही है। इसके साथ ही वहां पर कोविड अस्पताल बना हुआ है। इस स्थान से सड़क जाती है और सुरक्षा की दृष्टि से वहां मेला करवाना संभव नहीं है। जल्द बल्ह के बुद्धिजीवियों के साथ बैठकर इसकी योजना बनाई जाएगी।