संस्कृति सदन में पहाड़ी बोली के प्रचार के लिए सम्मेलन आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। पहाड़ी बोली को प्रोत्साहित करने और इसके प्रचार प्रसार के लिए संस्कृति सदन में वीरवार को भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। साहित्यकार डाॅ. पीसी कौंडल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। लतेश शर्मा ने प्राण प्रतिष्ठा कविता का पाठ किया। इसमें भगवान श्रीराम की मूर्ति प्रतिष्ठा का चित्रण किया। पूर्णेश गौतम ने लकमूंडी नामक पहाड़ी कविता पढ़ी। सुरेंद्र मिश्रा ने बढ़ती महंगाई और जनसंख्या की चिंता व्यक्त करती हुई कविता प्रस्तुत की।
पारूल अरोड़ा ने चिट्टा नामक कविता के माध्यम से नशे पर चिंता व्यक्त की। इसके अलावा राजेंद्र सिंह ठाकुर ने पुरानी दिवाली नई दिवाली नामक मंडयाली कविता सुनाकर सबका मनोरंजन किया। सीता राम वर्मा ने धुआं नामक कविता पढ़ी। मुरारी शर्मा, बबीता चौहान, उत्तम चंद, रूपेश्वरी शर्मा, भीम सिंह परदेसी, विनोद गुलेरिया, हरि प्रिया, भारत शर्मा, कृष्ण चंद महादेविया, कृष्णा ठाकुर आदि ने कविताओं के माध्यम से सामाजिक बुराइयों पर प्रहार कयया।
वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. पीसी कौंडल ने सूरज चांद सितारे भगवाने किधि जो बनाई रे, जीने रा मकसद नामक कविता सुनाकर मनुष्य जन्म के कर्तव्यों से रूबरू करवाया। उन्होंने सभी से पहाड़ी बोली में अधिक से अधिक रचनाएं लिखने का आग्रह किया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखिका अर्पणा धीमान की पुस्तक कहानी संग्रह नियति का जंगल का विमोचन किया। जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया ने सफल आयोजन के लिए सभी का आभार जताया। संवाद