एनएचएआई की दो याचिकाएं आंशिक रूप से स्वीकार
सोलनियम और ब्याज सहित अन्य वैधानिक लाभ रहेंगे बरकरार
जिला न्यायालय मंडी ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। बिलासपुर-नरचौक फोरलेन के लिए अधिगृहीत भूमि के मुआवजे से जुड़े दो मामलों में जिला न्यायालय मंडी ने एनएचएआई को आंशिक राहत दी है। अदालत ने मध्यस्थ एवं मंडलायुक्त मंडी के 9 फरवरी 2022 के आदेश को आंशिक रूप से रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि भूमि मालिकों को अतिरिक्त बाजार मूल्य का लाभ नहीं मिलेगा, जबकि सोलनियम और ब्याज सहित अन्य वैधानिक लाभ मिलते रहेंगे। मामला बल्ह तहसील के डडौर गांव के 12 भूमि मालिकों से जुड़ा है। राष्ट्रीय राजमार्ग-21 के बिलासपुर-नरचौक खंड के लिए वर्ष 2012 में उनकी जमीन अधिगृहीत की गई थी। सक्षम प्राधिकारी ने 28 नवंबर 2013 को मुआवजा तय किया था। इससे असंतुष्ट भूमि मालिकों ने धारा 3जी(5) के तहत मध्यस्थ के समक्ष मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी।
मध्यस्थ ने 9 फरवरी 2022 को बाजार दर बढ़ाने से इन्कार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के तरसेम सिंह फैसले के अनुसार वैधानिक लाभ देने के निर्देश दिए थे। इसके खिलाफ एनएचएआई ने वर्ष 2024 में जिला न्यायालय में दो याचिकाएं दायर कीं। जिला न्यायाधीश की अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए माना कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत अधिगृहीत भूमि पर भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 23(1-ए) के तहत अतिरिक्त बाजार मूल्य देय नहीं है। अदालत ने दोनों याचिकाएं आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मध्यस्थ का आदेश इसी सीमा तक रद्द कर दिया। दोनों पक्षों को अपने-अपने खर्च वहन करने के निर्देश दिए गए।