मंडी। शिक्षित बेटी अपना और अपने परिवार का नाम रोशन करती है। इसलिए बेटियों को शिक्षित कर समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाया जा सकता है। आज की बेटियों हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रंधाड़ा में वीरवार को अमर उजाला के ‘अपराजिता -100 मिलियन स्माइल्स’ कार्यक्रम में प्रधानाचार्य विरेंद्र कुमार गुप्ता ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार ने भी बेटियों और महिलाओं को सशक्त करने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं ताकि उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी हो सके। छात्राओं से कहा, अपनी जिंदगी का लक्ष्य निर्धारित करें। जब तक लक्ष्य पूरा नहीं होता है, तब तक शिक्षा जारी रखें। अगर आप शिक्षित होंगी तो अपने अधिकारों के प्रति भी जागरूक होंगी। उन्होंने अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम की सराहना की। कहा, इस तरह के कार्यक्रम से महिलाओं में जागरूकता बढ़ती है। मनोबल भी बढ़ता है। इस दौरान अपराजिता के 294 फार्म भरे गए।
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बेटों से कम नहीं हैं बेटियां
हिंदी प्रवक्ता मंजुला गुलेरिया ने कहा कि भारतीय नारी अपने को शिक्षित, सचेत एवं सशक्त बनाए तो वह समाज का अधिक उपयोगी अंग बन सकेगी। उन्होंने छात्राओं को अपनी शिक्षा को निरंतर जारी रखने का आह्वान किया। राजनीतिक शास्त्र के प्रवक्ता संत सिंह ने कहा कि आज की बेटियां बेटों से कम नहीं हैं।
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कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
प्रवक्ता मीनाक्षी भट्ट, अंजु शर्मा, हरीश चंद्र, सविता, नलिनी कांत, चंद लाल, मंजुला गुलेरिया, द्रोपदी देवी, रंजना कुमारी, पूनम, डीपीई देवराज, सरोज कुमारी, मीरा कौशल, पूजा गौतम, पूनम पाठक, हुकम चंद, नविता, मीना देवी, कौशल्या, कश्मीर सिंह, शिवराम, जोगराम, हेमराज, विकास, पूर्ण सिंह, मीना, खिमी देवी आदि मौजूद रहे।
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आगे बढ़ने के लिए परिवार का साथ जरूरी : शालिनी
शालिनी ने कहा कि बेटियों को बेटे के बराबर अधिकार देने और दोनों में भेदभाव न करने के लिए प्रेरित करते रहना चाहिए। बेटियों को आगे बढ़ने के लिए परिवार का साथ जरूरी है।
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बेटियों के प्रति बदलें विचाराधारा : शीला
शीला ने कहा कि आज की बेटियां लड़कों से कम नहीं हैं। बेटियों के प्रति हर व्यक्ति को अपनी विचारधारा बदलनी चाहिए।
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महिला शिक्षित होगी तो आत्मनिर्भर बनेगी : धर्मा
धर्मा देवी ने कहा कि अगर महिला शिक्षित होगी तो आत्मनिर्भर भी होगी। बेटियां शुरू से अपनी पढ़ाई की ओर ध्यान दें ताकि जीवन में हर परिस्थिति का सामना कर सके।
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सशक्त होने की है जरूरत : नेहा
नेहा ने कहा कि माता-पिता भले ही अपनी बेटियों को बेटों जैसा समझते हैं, मगर बेटी आज भी सुरक्षित नहीं दिखती। जब तक लड़कियों को समाज अच्छी नजर से नहीं देखता तब तक अत्याचार होते रहेंगे।
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अनमोल रत्न है बेटी :शशी बाला
शशी बाला ने कहा कि बेटियां अनमोल रत्न हैं। महिला के अधिकारों में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। समय गुजरने के साथ लड़कियों की शिक्षा के महत्व को महसूस किया जा रहा है।
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लक्ष्मी-दुर्गा का रूप है बेटी : शिवानी
शिवानी ने कहा कि जहां नारियों को सम्मान दिया गया है वहां साक्षात देवता निवास करते हैं। बेटी लक्ष्मी और दुर्गा का रूप है। यह अपने माता पिता के घर के साथ पराये घर को भी जगमगाती हैं।
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