मंडी जिला के शिकारी देवी की पहाड़ी। संवाद
गोहर (मंडी)। दिसंबर माह का आगाज हो चुका है, लेकिन शिकारी देवी और कमरूनाग की पहाड़ियों पर बर्फबारी नहीं हुई है। देव समाज और किसान-बागवान चिंतित हैं। चिलिंग आवर्स पूरे न होने से सेब का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।
दोनों धार्मिक स्थल बर्फबारी और बारिश का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन आसमान में बादल भी नहीं उमड़ रहे। मौसम खुशनुमा होने के कारण शिकारी देवी और कमरूनाग मंदिरों के कपाट बंद होने के बावजूद पर्यटक और श्रद्धालु वहां पहुंच रहे हैं।
बागवान भी सेब के बगीचों में तौलिये नहीं बना पा रहे हैं। इसके साथ ही खाद और गोबर ढालने का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। अब किसान-बागवान देवताओं की शरण में जाने को तैयार हैं। कमरूनाग को बारिश का देवता माना जाता है। देवता से बारिश की प्रार्थना करने के लिए गूरों से परते का क्रम शुरू हो सकता है। 90 दिनों से बारिश के अकाल से क्षेत्र के बागवान परेशान हैं। क्षेत्र के बागवानों हरीश, घनश्याम, लाल सिंह, मनोज, राजू, मुरारी, किशोरी, लीला प्रकाश, हेम सिंह, जसवंत, गगन, दीनू और परमा राम ने बताया कि खेती बाड़ी के सभी कार्य सूखे से बाधित हो गए हैं।
बड़ा देव के गूर देवी सिंह ने बताया कि देव कमरुनाग जल्दी बारिश और बर्फबारी बरसाएंगे। एसडीएम गोहर लक्ष्मण सिंह कनेट ने कहा है कि कमरुनाग शिकारी देवी के कपाट बंद है। उन्होंने सैलानियों और श्रद्धालुओं से दोनों मंदिरों की तरफ न जाने की सलाह दी है।