इतना बड़ा हादसा होने के तीसरे दिन भी कोई बड़ा नेता नहीं पहुंचा दुर्गम क्षेत्र मुल्थान
लोकसभा चुनाव के बीच त्रासदी से जूझ रहे प्रभावितों को नहीं मिला सहारा
कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के अधीन आता है मुल्थान, खुद ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोट/मुल्थान (मंडी)। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के अधीन आने वाले मुल्थान बाजार में तबाही के बीच अब नेता किस मुंह से वोट मांगेंगे। शुक्रवार को घटना के बाद यहां सीपीएस किशोरी लाल मौके पर पहुंचे और महज औपचारिकता निभाते हुए चंद घंटों में ही वापस लौट गए। रविवार को बैजनाथ से भाजपा के पूर्व विधायक मुल्खराज प्रेमी ने दौरा किया और चलते बने। खाली आश्वासनों के सहारे ढांढस बंधाने का काम हुआ।
त्रासदी के बीच तीन दिन से ग्रामीणों ने हिम्मत रखते हुए खुद मोर्चा संभाला है और विपरीत परिस्थितियों में डटे हुए हैं। यह ग्रामीणों की एकजुटता का ही प्रमाण है कि कंपनी प्रबंधन को तुरंत यहां मुआवजा देने के लिए राजी होना पड़ा है। इसके लिए ग्रामीण सड़क से मलबा न हटाने के लिए भी अड़े हुए हैं। विपदा के बीच ग्रामीणों को सहारा देने के लिए हिमाचल के प्रमुख दलों से कोई भी बड़ा नेता मुल्थान नहीं पहुंच पाया है। शासन ने भी इस घटना को हल्के में लिया है। यही वजह है कि कांगड़ा जिले से डीसी भी मौके पर नहीं पहुंच पाए हैं। यहां एसडीएम बैजनाथ और स्थानीय अधिकारी ही मौके पर डटे हुए हैं। इसे लेकर भी ग्रामीणों में रोष है।
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तबाही को तीन दिन हो गए हैं। प्रभावित बेघर हो गए हैं। कारोबार भी खत्म हो गया है। मुआवजे के नाम पर पांच-पांच हजार रुपये मिले हैं। शासन और प्रशासन को प्रभावितों के बारे में प्राथमिकता से सोचना चाहिए। -राम लाल, स्थानीय
तबाही का मंजर बेहद खतरनाक है, लेकिन कंपनी प्रबंधन, प्रशासन और शासन का रवैया शुरू में ढीला रहा। इसका खामियाजा प्रभावितों को भुगतना पड़ा है। चुनावी बेला में वोट के लिए हर कोई पहुंचता है, लेकिन इस त्रासदी में सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। -रिंकू राम, स्थानीय
शासन-प्रशासन के लिए यह घटना छोटी सी हो सकती है, लेकिन जीवनभर की पूंजी गंवाने वाले परेशान हैं। आखिर किस तरह सब ठीक होगा। इसे लेकर महज कोरे आश्वासन ही मिले हैं। कंपनी प्रबंधन और प्रशासन नुकसान का जायजा तो ले रहा है, लेकिन मुआवजा धरातल पर हुए नुकसान के आधार पर ही मिलना चाहिए। वोट मांगने वाले भी इस मसले पर सुध लें। -अशोक लाल, स्थानीय
शासन को इस घटना का संज्ञान लेना चाहिए। मात्र एक एसडीएम के सहारे सब कुछ छोड़ दिया है। कंपनी प्रबंधन नुकसान के भरपाई की बात तो कर रही है, लेकिन इसे पुख्ता बनाना भी सरकार का काम है। सिर्फ वोट मांगने से ही काम नहीं चलता है।-ज्ञान चंद, स्थानीय
घटना के बाद सीपीएस किशोरी लाल आए और अधिकारियों को निर्देश भी दिए। रविवार को पूर्व विधायक मुल्खराज प्रेमी ने दौरा किया। ग्रामीणों को इस तबाही से उभारने के लिए कोई कुछ नहीं बोल पाया है। सब देखने के बाद लौट गए। वोट मांगने आएं तो इस त्रासदी से उभारने का विजन भी साथ लाएं।
-लालमन, स्थानीय
घटना ने स्थानीय लोगाें को झकझोड़ दिया। मुश्किलों के बीच प्रभावितों को प्रशासन व कंपनी ने अस्थायी तौर पर रहने का इंतजाम तो कर दिया है, लेकिन आगे क्या होगा, इसे लेकर कुछ समझ नहीं आ रहा है। शासन व प्रशासन हर चीज को पुख्ता बनाए। वोट मांगने आने वाले भी इस पर मंथन करें।
-शाम लाल, स्थानीय