सार
मंडी के अलसू राजकीय प्राथमिक स्कूल का भवन फोरलेन निर्माण के दौरान टूटने के बाद चार साल से नहीं बन पाया है। स्कूल की 52 बच्चों वाली कक्षाएं दो किराये की दुकानों में चल रही हैं। एनएचएआई से भवन निर्माण के लिए 45 लाख रुपये मिलने के बावजूद जमीन की व्यवस्था नहीं हो पाई है। विभाग हर महीने 12,365 रुपये किराया दे रहा है।
फोरलेन निर्माण के दौरान अलसू प्राथमिक स्कूल का पुराना भवन टूट गया था।
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फोरलेन निर्माण के कारण विकास की भेंट चढ़ा राजकीय प्राथमिक स्कूल अलसू का भवन आज तक दोबारा नहीं बन पाया है। पुराना भवन टूटने के बाद पिछले चार साल से यह स्कूल किराये की दो दुकानों में चल रहा है। मौके पर हालात देखें तो नर्सरी से पांचवीं तक के 52 बच्चों की पढ़ाई दो किराये की दुकानों में सिमटी हुई है। कक्षाओं के संचालन में शिक्षकों को भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है। बच्चों के लिए खेल मैदान नहीं है। सड़क नजदीक होने के कारण वाहनों की आवाजाही का खतरा बना रहता है। बंदरों की मौजूदगी भी उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती है। स्कूल में एक ही शौचालय है, जिसका इस्तेमाल शिक्षक और बच्चे दोनों करते हैं।
मिड-डे मील बनाने के लिए अलग रसोईघर तक नहीं है और सीढ़ियों के नीचे बने छोटे से स्टोर में बच्चों का खाना तैयार किया जा रहा है। विडंबना यह है कि स्कूल के नए भवन निर्माण के लिए चार साल पहले ही एनएचएआई से करीब 45 लाख रुपये की राशि मिल चुकी है। इसके बावजूद जमीन की व्यवस्था न होने से भवन निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए शिक्षा विभाग ने दुकानें किराये पर ली हैं, जिनका हर महीने करीब 12,365 रुपये किराया चुकाया जा रहा है। चार साल में किराये की व्यवस्था तो चलती रही, लेकिन 52 मासूमों के लिए स्थायी छत का इंतजाम नहीं हो पाया। अभिभावक पूजा, ज्योति देवी, सीमा और पंकज का कहना है कि पहले स्कूल में करीब 70 बच्चे पढ़ते थे, लेकिन अब संख्या घटकर 52 रह गई है। अगर जल्द भवन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई गईं तो बच्चों की संख्या और घट सकती है।
सुरक्षित माहौल मिलना बच्चों का हक
स्कूल में पढ़ाई अच्छी है, लेकिन दो दुकानों में जगह न होने से दिक्कतें आ रही हैं। बच्चों को पढ़ाई के साथ सुरक्षित माहौल और खेलकूद की जगह भी मिलनी चाहिए। विभाग को अब केवल आश्वासन देने के बजाय निर्माण शुरू करना चाहिए। -सीमा, अभिभावक
बजट होने पर भी काम न होना विडंबना
एनएचएआई से बजट मिलने के बाद भी भवन न बनना चिंता का विषय है। बिना जरूरी सुविधाओं के अभिभावक बच्चों को स्कूल कैसे भेजें? बच्चों के बैठने तक की जगह नहीं है, इसलिए सबसे पहले स्कूल भवन बनना चाहिए। -ज्योति, अभिभावक
दुकानों में पढ़ाई कराना भारी मजबूरी
एसएमसी ने कई बार मुद्दा उठाया है। दो दुकानों में स्कूल चलाना मजबूरी है। हम बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। शिक्षा मंत्री को भी ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन महीनों बीतने पर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। -मोना कुमारी, प्रधान, एसएमसी
स्कूल के तीन कमरों के निर्माण के लिए उच्चाधिकारियों से निर्देश मिले हैं। उपनिदेशक गुणवत्ता की ओर से एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। इसके तैयार होते ही आगामी कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा। -डॉ. सुनील दत्त, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा, मंडी
एनएचएआई ने चार साल पहले ही 45 लाख की राशि जमा करवा दी थी। उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा मंडी की ओर से स्कूल से संबंधित जानकारी मांगी गई थी, जिसे औपचारिकताएं पूरी कर भेज दिया गया है। -प्रदीप कुमार, खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी