मंडी। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव की शोभा बढ़ाने वाले देवी-देवताओं का स्थल पांच दशक बाद अब एक बार फिर बदलेगा। महाशिवरात्रि मेले के दौरान वल्लभ महाविद्यालय के परिसर में निश्चित स्थान पर विराजमान होने वाले पंजीकृत देवी-देवता अब की बार पड्डल मैदान में पैगोडा शैली के तंबू के नीचे बैठेंगे। गत वर्ष भी हालांकि कुछ देवी-देवताओं को पड्डल में स्थान दिया था, लेकिन अब की बार सभी पंजीकृत देवी-देवताओं को निश्चित स्थान आवंटित कर स्थान दिया जाएगा।
महाशिवरात्रि मेले में आने वाले देवी-देवता सत्तर के दशक तक बाबा भूतनाथ मंदिर से लेकर सेरी चानणी तक के दायरे में विराजमान होते थे। बदलते दौर में महाशिवरात्रि मेले के विस्तार के साथ देवी-देवताओं के बैठने वाले स्थल में भी बदलाव हुआ है। 1972-73 से पड्डल मैदान में देवी-देवता महाशिवरात्रि के दौरान विराजमान होना शुरू हुए हैं।
वल्लभ महाविद्यालय परिसर में चौहारघाटी, सराज, सनोर समेत अन्य क्षेत्र के देवी-देवता अलग-अलग स्थान में विराजमान होते हैं। सराज क्षेत्र के देव चपलांदू नाग, आदि ब्रह्मा, लक्ष्मीनारायण बायला समेत अन्य देवी-देवता परिसर के बीचोबीच पीपल के पेड़ के टियाले पर विराजमान होते हैं।
देव झांजणू छमाहूं समेत अन्य देवी-देवताओं का भी बैठने का अपना निश्चित स्थान रहा है, लेकिन परिसर में भवन निर्माण के कारण पिछले कुछ समय से सर्व देवता सेवा समिति को देवी-देवताओं के बैठने वाले स्थान में बदलाव करना पड़ रहा है। कुल्लू दशहरे की तर्ज पर पड्डल में भी देवी-देवताओं को अब निश्चित स्थान उपलब्ध होने की उम्मीद है।
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अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेले के लिए अब की बार भी सभी 216 पंजीकृत देवी देवताओं को प्रशासन की ओर से निमंत्रण दिया जाएगा। पंजीकृत देवी-देवताओं को पड्डल मैदान में स्थान उपलब्ध करवाया जाएगा, इसकी रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
-शिव पाल शर्मा, अध्यक्ष सर्व देवता सेवा समिति
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