करसोग उपमंडल के दुर्गम सराहन पंचायत में अफीम खेती के खिलाफ कार्रवाई करती पुलिस टीम।
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करसोग (मंडी)। उपमंडल करसोग के दुर्गम क्षेत्रों में अवैध रूप से अफीम की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है। शनिवार को करसोग पुलिस टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर चेखरी गांव में अफीम की खेती पकड़ी है। पुलिस ने 190 अफीम के पौधे बरामद किए। जिसमें 15 पौधे पुलिस ने जांच के लिए कब्जे में लिए हैं।
बाकी पौधों को मौके पर ही नष्ट किया गया। 20 दिनों के भीतर करसोग पुलिस ने अवैध रूप से अफीम की खेती करने पर पांच केस दर्ज किए हैं। पुलिस ने काले सोना उगाने वालों के खिलाफ अभियान जारी रखा है। शनिवार को करसोग थाना पुलिस दल चेखरी गांव के पास गश्त पर था। इसी दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि गांव के नजदीक अफीम की खेती की जा रही है। जिस पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पंचायत के उपप्रधान बिशन दास, लंबरदार रणजीत को शामिल कर अफीम की खेती को कब्जे में लिया। अफीम के पौधों में फूल खिलने के साथ डोडे भी लगे थे।
पुलिस ने जांच में पाया कि अफीम के पौधे चकवाह गांव निवासी रमेश कुमार के खेतों में लगे हैं। पुलिस ने रमेश कुमार के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है। मामले की जांच एएसआई स्वरूप को सौंपी गई। एसएचओ करसोग सुनील कुमार ने बताया कि अफीम की खेती करने वालों और नशा बेचने वालों के खिलाफ करसोग पुलिस ने विशेष अभियान चला रखा है। अफीम की खेती करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
करसोग पुलिस ने विशेष अभियान के तहत 20 दिनों के भीतर अवैध रूप से अफीम की खेती करने के पांच मामले पकड़े हैं। पुलिस ने मांजू, माहूंनाग, जकलीन, टरौर गांव के हजलनाला, चखेरी गांव से 18 हजार से अधिक अफीम के पौधे बरामद किए हैं। वहीं औट तहसील के दकस्ती गांव में कमांद पुलिस ने पांच हजार अफीम के पौधे बरामद किए हैं। जिला के दुर्गम क्षेत्रों में आज भी चोरी छिपे लोग अवैध रूप से अफीम की खेती उगा रहे हैं। लोकल मार्केट में अफीम की कीमत दो लाख रुपये तक है। जबकि दिल्ली और मुंबई की मार्केट में पहुंचने पर अफीम की कीमत 20 लाख तक मिलती है।