इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के अंतिम दिन 11 लघु फिल्मों का प्रदर्शन
सिने अभिनेता पारितोष भी पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। लॉकडाउन में घर लौटने को मजबूर प्रवासी मजदूर की पीड़ा और नौकरी की तलाश में मुंबई पहुंचे युवा की बेबसी ने मंगलवार को मंडी के पड्डल मैदान में दर्शकों को भावुक कर दिया। सोसायटी फॉर हिमाचल आर्ट एवं कल्चर (शाख) के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के चौथे और अंतिम दिन 11 लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। इनमें चप्पल और एमबीए ने खास प्रभाव छोड़ा।
‘चप्पल’, ‘जवाबों का सफर’, ‘साइलेंस’, ‘लाख की चूड़ियां’, ‘जोकर’, ‘मौन’, ‘क्रॉसिंग’, ‘अल्पविराम’, ‘अदम्य’, ‘तनुज’ और ‘एमबीए’ जैसी फिल्मों में सामाजिक सरोकार, बेरोजगारी, संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं को अलग-अलग अंदाज में प्रस्तुत किया गया। आयोजकों रामपाल मलिक और जय कुमार जैक ने बताया कि एमबीए में कॅरिअर बनाने मुंबई पहुंचे आसिफ खान की बेरोजगारी और रहने के लिए जगह तलाशने की जद्दोजहद को व्यंग्य के जरिये दिखाया गया है। मंडी के अरुण बहल ने राजू भाई की भूमिका निभाई, जबकि हैदर अली ने मुख्य भूमिका के साथ निर्देशन भी किया। वहीं, रवि टंडन निर्मित और शुभम शर्मा निर्देशित चप्पल ने लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की मुश्किलों को सामने रखा। फिल्म में अपने पिता के लिए चप्पल लेकर घर लौटने का एक मजदूर का अधूरा सपना दिखाया गया, जिसके मार्मिक अंत ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। फेस्टिवल में सिने अभिनेता पारितोष मंडी पहुंचे। आयोजकों ने उन्हें शॉल, टोपी और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान बड़ी संख्या में कला प्रेमी मौजूद रहे।