विनाशकारी बारिश और भूस्खलन ने सराज के परवाड़ा गांव में कई जिंदगियां दफन कर दीं। यहां मलबे से एक जीवन, एक उम्मीद और एक भविष्य ने फिर जन्म लिया। यह कहानी है नौ महीने की नितिका की, जिसने आंखों के सामने अपने माता-पिता और दादी को खो दिया, लेकिन खुद चमत्कारी ढंग से बच निकलीं। भारी तबाही के बीच मासूम नितिका को मलबे से सही-सलामत निकालना किसी चमत्कार से कम नहीं था। यही कारण है कि आज सभी उसे 'उम्मीद की बच्ची' कहने लगे है।
चाची तारा देवी ने नितिका को अपने पास रखा
नितिका को अनाथ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि अब पूरा जिला, पूरा प्रदेश और देश उसका परिवार बनता जा रहा है। जिला प्रशासन ने नितिका के नाम पर दो बैंक खाते खोले हैं। इसमें लोग दान कर रहे हैं। बल्ह की एसडीएम स्मृतिका नेगी जब आपदा प्रभावित स्थल पर पहुंचीं तो मासूम बच्ची को देख उनका दिल भर आया। उन्होंने बच्ची को गोद में उठाया और कहा, यह कोई साधारण बच्ची नहीं, सुपर गर्ल है। उनकी पहल पर ही खाता खोला गया और लोगों से नितिका के लिए मदद की अपील की गई। कई अधिकारियों ने खुद दान किया। फिलहाल नितिका को उसकी चाची तारा देवी ने अपने पास रखा है। उन्होंने उसे अपने ही बच्चे की तरह पालने का संकल्प लिया है।