मंडी। खुली बोली के माध्यम से आवंटित सात दुकानों का किराया कम करने के मामले में नगर परिषद मंडी ने जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी दी है। जांच में यह साफ हो गया है कि दुकानों का किराया आवंटन के बाद कम किया था। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि दुकानों का किराया कम करने को लेकर बकाया राशि वसूलने के नोटिस भी जारी हुए हैं। लेकिन चार साल से यहां नोटिस ही जारी होते रहे।
मंडी बचाओ संघर्ष मोरचा ने यह मामला उठाया था। इसके बाद नप के कार्यकारी अधिकारी एवं तहसीलदार सदर अजय पराशर को जांच सौंपी थी। जांच में पाया गया कि पुलिस चौकी के सामने, खलियार, अस्पताल रोड पर बनी सात सरकारी दुकानों को वर्ष 1992 में खुली बोली से आवंटित किया था। लेकिन वर्ष 1999 में तत्कालीन नप ने दो दुकानों का किराया गरीबी के आधार पर इकरारनामा कर कम कर दिया। अस्पताल रोड की चार दुकानों का किराया बिना इकरारनामे के ही घटा दिया है। नप ने इस बारे में प्रस्ताव पारित किया था। लेकिन प्रस्ताव को शहरी विकास निदेशक ने वर्ष 2010 में निरस्त कर किराया कम करने की तारीख से बकाया राशि वसूलने के आदेश दिए थे। नीलामी के बाद सात दुकानों का किराया कम करने पर अंडर सेक्रेटरी ने भी नोटिस जारी किया था। लेकिन चार साल बाद भी नप बकाया राशि वसूली के लिए नोटिस ही जारी करती रही है।
रिपोर्ट के मुताबिकपुलिस चौकी के सामने दो दुकानें बोली पर 1850 और 2525 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से आवंटित हुई थी। इसका मासिक किराया घटाकर 500 रुपये कर दिया था। खलियार में बनी एक दुकान का मासिक किराया बिना एग्रीमेंट के 775 प्रतिमाह से घटाकर 680 कर दिया। अस्पताल रोड पर चार दुकानों का किराया भी कम किया है। नप के कार्यकारी अधिकारी अजय पराशर ने कहा कि दुकानों का किराया कम करने की जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी है।
नप मनमर्जी से वसूल रही किराया
मंडी बचाओ संघर्ष मोरचा के अध्यक्ष लक्ष्मेंद्र गुलेरिया ने कहा कि एग्रीमेंट किए बगैर नप मनमर्जी से किराया वसूल रही है। सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों के बाद भी नप चार साल बाद मात्र किराया वसूली नोटिस दिए जाने की गोलमोल जांच रिपोर्ट दे रही है। खुली बोली के बाद भी दुकानों का किराया कम करने से नप को नुकसान हुआ है।