मंडी। राज्य सूचना आयुक्त ने समय पर सूचना न देने पर तहसीलदार सदर को दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना जन सूचना अधिकारी को आवेदक के पक्ष में अदा करना होगा। उपतहसील बालीचौकी के सुधराणी गांव निवासी आरटीआई कार्यकर्ता संतराम ने सदर तहसील के तहसीलदार से सूचना के अधिकार के तहत 19 जून 2013 को सूचना मांगी थी कि दिसंबर 2012 से मार्च 2013 तक निशानदेही के कितने आवेदन तहसील में किए हैं। इसके अलावा उन्होंने यह सूचना भी मांगी थी कि इन दिनों निशानदेही के लिए राजस्व विभाग के कितने सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा ली जा रही है। सरकार की ओर से क्या निर्देश हैं। जन सूचना अधिकारी तहसीलदार सदर ने उन्हें 16 जुलाई 2013 को पत्र जारी करके निर्धारित शुल्क जमा करवाने के बाद सूचना प्राप्त करने को कहा। लेकिन इस पत्र को तहसील से डाकघर तक पहुंचने में 17 दिन का वक्त लगा। पत्र पर डाकघर की मोहर दो अगस्त 2013 की लगी थी। पत्र मिलने पर आरटीआई कार्यकर्ता जब सूचना लेने कार्यालय पहुंचे तो बताया गया कि अभी सूचना तैयार नहीं है। ऐसे में संतराम ने 6 अगस्त 2013 को प्रथम अपीलीय अधिकारी (उपायुक्त) मंडी के पास अपील दायर की थी। डीसी ने सूचना अधिकारी को तीन दिन के भीतर सूचना मुहैया करवाने के आदेश दिए थे। लेकिन जन सूचना अधिकारी इसके बावजूद जानकारी देने में नाकाम रहे। ऐसे में संतराम ने सूचना हासिल करने के लिए राज्य सूचना आयुक्त का दरवाजा खटखटाया। राज्य सूचना आयुक्त के डी बातिश के न्यायालय ने द्वितीय अपील की सुनवाई के दौरान जन सूचना अधिकारी को तलब किया था। राज्य सूचना आयुक्त ने आवेदक संतराम को सूचना मुहैया करवाने में लापरवाही बरतने पर जन सूचना अधिकारी को फटकार लगाई और आवेदक के पक्ष में 2000 रुपये हर्जाना एक माह में अदा करने के आदेश दिए। राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आवेदक को एक छोटी सी सूचना हासिल करने के लिए राज्य सूचना आयोग शिमला के कार्यालय तक तीन बार आना पड़ा। राज्य सूचना आयुक्त ने आवेदक के पक्ष में तुरंत सूचना मुहैया करवाने के आदेश दिए। इस पर जन सूचना अधिकारी की ओर से आवेदक को सुनवाई के दौरान ही सूचना मुहैया करवा दी गई।