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परंपरा: 27 को मृत देह में से फिर जीवित हो उठेंगे नरवेदी पंडित

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हुरंग में बड़ादेयो हुरंग नारायण के काहिका कारज का आगाज
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चौहारघाटी के आठ देवताओं के रथ देवलुओं के साथ आज पहुंचेंगे गांव
छिद्रा पापों से मुक्ति के निवारण के लिए चारवेद सजाकर किया मंत्रोच्चारण
अमर उजाला ब्यूरो
पधर (मंडी)। नरवेदी पंडितों के मंत्रोच्चारण के बाद तीन दिवसीय काहिका कारज का चौहारघाटी के हुरंग गांव में बुधवार को भव्य आगाज हुआ। बड़ादेयो हुरंग नारायण को समर्पित काहिका उत्सव में देवगढ़, हस्तपुर, अमरगढ़ चौहारघाटी के आठ देवताओं के रथ सैकड़ों देवलुओं के साथ वीरवार को हुरंग गांव में पहुंचेंगे। पांच वर्ष के उपरांत मनाए जाने वाले इस काहिका पर्व में हजारों की संख्या में श्रद्धालु आने वाले तीन दिनों तक हुरंग गांव में डटे रहेंगे। हराबाग के नरवेदी पंडित परिवार द्वारा कुष्ठ रोग और छिद्रा पापों से मुक्ति निवारण के लिए मंदिर के समीप देवदार के जंगल की बणी में, जहां हुरंग नारायण की दादी सहित पूरा परिवार रहता है, वहां चारवेद सजाकर मंत्रोच्चारण किया।। वीरवार सुबह हुरंग नारायण सहित सभी मेहमान देवताओं का छिद्रा होगा। बुधवार रात को मुरगण के उपरांत नड़ की पत्नी ने बणी में प्रवेश कर महिलाओं के लिए प्रवेश का मार्ग खोला। नरवेदी पंडितों ने चारवेद के नीचे मंत्रोच्चारण कर हवन पाठ किया और देव हुरंग नारायण की गाथा, इतिहास का वर्णन किया। देवताओं का छिद्रा घाटी वजीर देव पशाकोट की उपस्थिति में होगा।
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ये देवता पहुंचेे उत्सव में
काहिका उत्सव में चौहारघाटी के समस्त देवता शिरकत करते हैं। पधर का सुराहण काहिका उत्सव में देव हुरंग नारायण मुख्य भूमिका निभाते हैं। हुरंग काहिका में भगवान बलराम रूपी देव घड़ौनी नारायण, घाटी वजीर देव पशाकोट, देव त्रैलू गहरी, देव द्रुण गहरी, देव पेखरू गहरी, कपलधार गहरी, शिल्हधार गहरी के रथ बुधवार सायं तक हुरंग गांव पहुंचे। काहिका उत्सव में पहुंचे सभी मेहमान देवताओं की अगुवानी बड़ादेयो हुरंग नारायण करेंगे। बुधवार रात को यहां मंदिर के समीप चारवेद के नीचे मुरगण के साथ काहिका उत्सव धूमधाम के साथ शुुरू हुआ। ....
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27 जुलाई को मृत देह से फिर जीवित होंगे नड़
नड़ पवन कुमार 27 जुलाई को काहिका के अंतिम दिन देव शक्ति से मृत देह को पाएंगे। इसे जमीन में दफनाने के बाद पार्थिव देह को हुरंग गांव में घुमाया जाएगा। इस दौरान शोक में डूबा पूरा नड़ परिवार देव हुरंग नारायण सहित समस्त देवताओं से पवन के जिंदा होने की गुहार लगाएगा। इसे समस्त देवतागण बाद में जीवन दान का आशीर्वाद देंगे और देव शक्ति से नड़ पवन कुमार फिर जिंदा होंगे।
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