नगवाईं (मंडी)। स्नोरघाटी के दलासणी गांव के लोगों ने अनूठी पहल की ही है। अपने गांव को हरा भरा बनाने के लिए दलासणी गांव के लोगों ने देश के शहीदों के नाम पर पौधरोपण अभियान शुरू किया है। हर रविवार को ग्रामीण बच्चों के जन्म दिवस पर शहीदों के नाम से पौधरोपण करेंगे। स्नोर घाटी में पनारसा के दूसरे छोर पर नदी के पार स्थित कुल्लू जिले के दलासणी गांव के युवकों, महिला मंडलों सहित पूरे गांव के बुजुर्गों, महिलाओं व बच्चों ने गांव के आसपास के क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के लिए मुहिम की शुरुआत की। इसके लिए रविवार को गांव में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर (सेवानिवृत्त) ने बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में शिरकत की। मुख्य अतिथि ने भी ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया और इस मुहिम की तारीफ की। खुशहाल ठाकुर ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में ग्रामीण देश के शहीद सैनिकों के नाम पर पौधरोपण कर रहे हैं। कार्यक्रम के आयोजक यशवंत ने बताया कि गांव के युवा, महिलाएं और बुजुर्ग अब हर रविवार को पौधरोपण किया करेंगे। गांव के हर बच्चे का जन्म दिन पौधा लगाकर मनाया जाएगा। यशवंत ने बताया कि देश के शहीद सैनिकों के नाम पर भी पौधरोपण किया जाएगा। जिससे एक तो पर्यावरण हरा भरा रहेगा वहीं, प्रदेश के शहीदों को सम्मान भी मिलेगा। इस मौके पर डा. बुद्धि सिंह, महिला मंडल की प्रधान मीरा देवी, जय सिंह, किरण बाला समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
भावुक होकर बोले, कारगिल युद्ध में कर्नल विश्वनाथन ने गोद में तोड़ा था दम
ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर ने कारगिल युद्ध के अनुभव भी साझा किए। कहा कि 19 साल पहले मई से जुलाई तक कारगिल का युद्ध लड़ा गया था। 2 जून 1999 की रात को वह तोलोलिंग की चोटी को फतह करने के लिए दुश्मन के साथ लड़ाई लड़ रहे थे। उनके साथ उनके एक जांबाज साथी कर्नल विश्वनाथन भी मोर्चे पर डटे हुए थे। 2 जून 1999 की रात को पहाड़ी की चोटी से भारी फायरिंग शुरू हो गई। जिससे कर्नल विश्वनाथन को गोली लग गई। वह विश्वनाथन को गोद में पकड़ कर सहलाते रहे। लेकिन कर्नल विश्वनाथन ने दम तोड़ दिया।