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धर्मपुर अस्पताल एक डाक्टर के सहारे, लोग परेशान

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डॉक्टर - फोटो : amar ujala
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अमर उजाला ब्यूरो
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धर्मपुर (मंडी)। विस क्षेत्र धर्मपुर में सरकार बदलने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। यहां पर यदि एक डॉक्टर अवकाश पर चला जाए तो लोगों को मामूली से जुकाम-बुखार के लिए भी मीलों का सफर करना पड़ता है। पूर्व कांग्रेस सरकार ने धर्मपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा बढ़ाकर सिविल अस्पताल किया था और इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी थी, लेकिन न यहां चिकित्सकों की नियुक्ति हुई और न ही अन्य स्टाफ बढ़ा। इसकी वजह से मरीजों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यह अस्पताल महज रेफरल अस्पताल बनकर रह गया है। एक डॉक्टर के सहारे से यह अस्पताल चल रहा है। अगर यहां कोई घटना या दुर्घटना हो जाए तो फिर शव का पोस्टमार्टम भी रेफरल अस्पताल सरकाघाट में करवाना पड़ता है। इसके कारण संधोल से लेकर स्योह, पैहड, मंडप, टीहरा गद्दीधार सहित क्षेत्र के सभी इलाकों के लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने धर्मपुर स्वास्थ्य केंद्र में शव गृह की व्यवस्था करने की घोषणा कर पोस्टमार्टम की सुविधा यहीं देने की बात कही थी लेकिन, आज भी घटना और दुर्घटना होने पर शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकाघाट ही ले जाना पड़ता है, जो संधोल से करीब 65 किमी, स्योह से 45 किमी, पैहड़ से 45 किमी, मंडप से 45 किमी, टिहरा और गद्दीधार से भी इसकी दूरी 30 किमी से ज्यादा है। लोगों राजकुमार, संजीव कुमार, पाल सिंह, वीरी सिंह, श्यामलाल, विधि चंद, भूरी सिंह, कांता देवी, सावित्री देवी, विमला देवी, हेमराज, करतार सिंह, बंसी लाल, हेतराम, हरिया राम, सुनीता देवी, बविता देवी ने सरकार से धर्मपुर स्वास्थ्य केंद्र की दशा और दिशा बदलने की मांग की है।
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बीएमओ संधोल रमेश कुमार ने कहा कि सरकार ने यहां के लिए चिकित्सकों के आदेश कर दिए हैं और जैसे ही यह चिकित्सक ज्वाइन करेंगे तो लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी।
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