सुंदरनगर (मंडी)। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ मंडी की बैठक में 25 फीसदी से कम रिजल्ट देने वाले अध्यापकों की वेतन वृद्धि रोकने के शिक्षा विभाग के फरमानों का विरोध जताया गया। बैठक जिला प्रधान अश्वनी गुलेरिया की अध्यक्षता में हुई। जिला प्रधान अश्वनी ने कहा कि अध्यापक की सूचना दिए बगैर और उसकी टिप्पणी सुने बिना वेतन वृद्धि रोकना एक दुखद निर्णय है। सवाल उठाया कि 25 फीसदी से कम परीक्षा परिणाम आने पर शिक्षक ही क्यों दोषी करार दिए जाते हैं? इसके और भी कई कारण हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आठवीं तक फेल न करना, अध्यापकों को गैर शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल करना, चुनावी ड्यूटी आदि बहुत सी गतिविधियों में शामिल रहने के कारण पढ़ाई बाधित होती है। उन्होंने कहा कि आए दिन विभाग के नए फरमानों से अध्यापक एक लिपिक बनकर रह गया है। सीसीटीवी कैमरे लगने से परीक्षा परिणाम प्रभावित हुआ है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए विभाग को इतने सख्त फरमान जारी नहीं करने चाहिए। इसकी हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ मंडी कड़ी निंदा करता है। अगर विभाग इसका सही से हल नहीं करता है और वेतन वृद्धि रोकने में अड़ा रहा, तो संघ धरना प्रदर्शन और हड़ताल से भी गुरेज नहीं करेगा। बैठक में जिला महासचिव तिलक नायक, वित्त सचिव राजकुमार, मुख्य सलाहकार, मंशा राम सहित विभिन्न खंडों के प्रधान, सचिव, कोषाध्यक्ष उपस्थित रहे।
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