गोहर (मंडी)। पंजाब के मटर की बाढ़ आने से हिमाचल के मटर के दामों में आई गिरावट से क्षेत्र के हजारों किसानों की कमर टूट गई है। अच्छे दाम न मिलने से किसानों के चेहरे लटक गए हैं। किसानों को मटर के दाम 15 से 20 रुपये किलो तक मिल रहे हैं। जिससे किसानों का खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा है। मौवीसेरी, बाल्हड़ी, स्यांज, देलग टिक्करी, बासा, चैलचौक, गोहर, किलिंग समेत क्षेत्र की अनेक पंचायतों के किसानों की मटर मुख्य नकदी फसल है। इस वर्ष बारिश कम होने से मटर के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। उत्पादन कम होने के बाद दामों में आई गिरावट से किसानों में हड़कंप मच गया है। बारिश न होने के कारण खेतों में ही मटर का बीज सड़ कर खत्म हो गया था। जिस कारण मटर की बहुत कम फसल हुई है। फसल कम होने के बाद अब मटर के अच्छे दाम न मिलने के कारण किसान नाखुश है। किसानों महेंद्र कुमार, टेक चंद, हेम सिंह, जालम राम, हेत राम, मोहन सिंह, दामोदर दास, धर्म सिंह, चमन लाल, समेत अनेक किसानों ने बताया कि 1 सौ रुपये से 2 सौ रुपये किलो तक मटर का बीज खरीदने के बाद किसानों को 20 रुपये दाम मिलने से उनकी कमर टूट गई है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि किसानों को सूखे से हुए नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए। राज कुमार, सीते राम, महेंद्र पाल, मनोज कुमार, अजय कुमार और सब्जी मंडी चैलचौक के अन्य आढ़तियों ने बताया कि पंजाब, हरियाणा से अभी मटर की भरपूर खेप आ रही है। जिस कारण मटर का दाम अभी बहुत कम मिल रहा है। बाहरी राज्यों से मटर की सप्लाई कम हो जाने पर मटर के दामों में उछाल आ जाएगा।