गोहर (मंडी)। 35 वर्ष की उम्र में देश की सरहद पर भारत माता की रक्षा करते हुए आतंकवादी हमले में शहीद हुए मंडी जिला के अपर पंडोह के जवान इंद्र सिंह का पार्थिव शरीर शहादत के दूसरे दिन भी उसके घर नहीं पहुंच सका। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। दो दिन से परिवार के सदस्यों ने अन्न ग्रहण नहीं किया है। शहीद इंद्र सिंह की पत्नी इंद्रा देवी 7 वर्षीय बेटा उदय सिंह और मां रुकमणि के लिए राइफल मैन इंद्र सिंह की शहादत पर गर्व तो है लेकिन साथ में इंद्रा देवी और उदय के जीवन का सहारा और मां रुकमणि के कलेजे का टुकड़ा उनसे छिन जाने का बेहद गम भी है। मंगलवार को अपर पंडोह गांव में शहीद के घर ढांढस बंधाने वालों को तांता लगा रहा। एसडीएम सदर पूजा चौहान ने मंगलवार दोपहर शहीद इंद्र सिंह के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी और अंत्येष्टि स्थल का दौरा कर वहां पंचायत प्रतिनिधियों को उचित साफ सफाई करने के निर्देश दिए। सेना से सेवानिवृत्त हुए शहीद इंद्र सिंह के मामा मान सिंह ने बताया कि पहले वाया चंडीगढ़ शव हवाई जहाज में लाने की सूचना थी। लेकिन, सेना की ओर से उन्हें सूचना दी गई है कि शहीद इंद्र सिंह का पार्थिव शरीर मंगलवार शाम को पठानकोट पहुंचाया जाएगा। जहां से बुधवार सुबह शहीद का शव पंडोह उनके घर पहुंचाया जाएगा। बुधवार को पंडोह में शहीद इंद्र सिंह की राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि की जाएगी। मणिपुर में चंदेल जिला के महामणि गांव में सोमवार सुबह हुए बम विस्फोट में असम राइफल के दो जवान शहीद हो गए थे। जिनमें मंडी जिला के पंडोह गांव का इंद्र सिंह भी शामिल था। इंद्र सिंह 2003 में असम राइफल में भर्ती हुआ था। शहीद के मामा मान सिंह ने बताया कि इंद्र सिंह हाल ही में मणिपुर ड्यूटी देने गया था। इस दौरान गश्त पर एक आतंकी विस्फोट में इंद्र ने शहादत का जाम पी लिया। बुधवार को पंडोह में तिरंगे में लिपटी शहीद इंद्र सिंह की पार्थिव देह पहुंचाई जाएगी।