कमरूघाटी के सेब बगीचों में वूली एफिड का हमला
एप्पल वैली करसोग और जंजैहली में भी बढ़ा प्रकोप
हवा के झोंकों से एक से दूसरे बगीचे में पहुंच रहा कीट
घनश्याम ठाकुर
चैलचौक (मंडी)। कमरूघाटी के सेब बगीचों में वूली एफिड कीट के हमले से सेब बागवानों में हड़कंप मच गया है। मौसम शुष्क होने के बाद वूली एफिड कीट तने से टहनियों पर चढ़ गया है और पौधे को खराब कर रहा है, जिससे सेब बागवानों की नींद उड़ गई है। हवा के झोंकों से वूली एफिड कीट एक बगीचे से दूसरे सेब बगीचे में पहुंच रहा है, जिससे वूली एफिड कीट का हमला घाटी के दर्जनों बगीचों में पौधों को खराब कर रहा है। कमरूघाटी के साथ साथ एप्पल वैली करसोग, जंजैहली और बालीचौकी के बगीचों में भी वूली एफिड कीट का प्रकोप बढ़ने के समाचार है। सेब बागवानों ने बागवानी विशेषज्ञों और विभगीय अधिकारियों को सूचित कर दिया है। कमरूघाटी के सरोआ, कुटाहची, फनगयार, बाढू, शकोहर, थमाडी, घीडी, रोहांडा, चौकी, पंडार, चुराग, चरखडी, करसोग, जंजैहली, थुनाग, बगस्याड़, कांढा, सलाहर, बागाचुनोगी, भाटकीधार, थाची और पंजाई इलाकों से भी वूली एफिड कीट के हमले की सूचना है।
क्या कहते हैं सेब बागवान
सेब बागवानों चंद्रमणी ठाकुर, बीकेठाकुर, मनोज ठाकुर, हेमराज ठाकुर, परमा राम, लाभ सिंह, भीम सिंह, दिनेश कुमार, नारायण सिंह, मोहर सिंह और शेर सिंह ठाकुर ने बताया कि उनके सेब बगीचे में मौसम शुष्क होने के कारण वूली एफिड कीट ने पांव पसार लिए हैं और यह कीट तने से पौधों की टहनियों में घर कर रहा है और पौधों के बीमों को नष्ट कर रहा है। इससे सेब बागवानों को भावी फसल को लेकर चिंता सताने लग गई है।
यह हैं सुझाव
उद्यान विकास अधिकारी विरेंद्र कुमार ने बताया कि क्षेत्र में शुष्क मौसम के कारण सेब बगीचों में वूली एफिड कीट का हमला शुरू हो गया है। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने बताया कि बागवानी विभाग की समयसारिणी को देख बागवान महकमे की सिफारिश के अनुसार वूली एफिड कीट को नष्ट करने के लिए निर्धारित किए गए छिड़काव को करें। उन्होंने कहा कि कीटनाशक दवाओं में कलोरोफारिफोस की डरमट, मासवान दवा का छिड़काव कर दो मिलीलीटर एक लीटर पानी में डालकर छिड़काव करें।
क्या है वूली एफिड
वूली एफिड कीट रूई के आकार का कीट होता है जो टहनियों के बीच में बीमों को नष्ट करता है और बारिश और बर्फबारी में तनों में छिप जाता है। यह कीट सेब फल तैयार करने वाले बीमों को तबाह करता है, जिससे सेब के उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की जाती है।