मंडी। नगर परिषद मंडी नगर निगम शिमला से दोगुना कर वसूल रही है। पब्लिक वेलफेयर फाउंडेशन संस्था के पदाधिकारियों ने नप मंडी पर यह आरोप लगाए हैं। संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि मंडी में रिहायशी मकानों के लिए सभी जोन (क्षेत्र) में 12 प्रतिशत टैक्स लगाया है जो बहुत ज्यादा है। जबकि शिमला नगर निगम में अपने रहने के रिहायशी भवनों के लिए विभिन्न जोन में 2 और 6 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है। शिमला में अपने रहने के 100 वर्ग मीटर तक के छोटे रिहायशी भवनों पर विभिन्न जोन में 2 और 3 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है। लेकिन, मंडी शहर में यह राहत न देकर सभी जोन में 12 प्रतिशत हाउस टैक्स लगा दिया गया है। इतना ही नहीं शिमला में तो बिना आवासीय भवनों पर भी अधिकतम 5 से 10 प्रतिशत टैक्स लगाया है। जबकि, मंडी में बिना आवासीय भवनों पर 15 प्रतिशत हाउस टैक्स लगाया गया है। संस्था की मानें तो शिमला में संपत्ति कर 5.40 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित है जबकि, मंडी में यह 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर निश्चित किया गया है। संस्था ने नगर परिषद से मांग की है कि रिहायशी भवनों के हाउस टैक्स की दरें कम की जाएं और यह कम से कम शिमला शहर की तरह 2 और 3 प्रतिशत की जाएं। उसी तरह बिना आवासीय भवनों में भी दरों को कम करके शिमला की तर्ज पर 10 प्रतिशत किया जाए।
ज्ञापन प्रेषित कर दरें कम करने की मांग उठाई
पब्लिक वेलफेयर फाउंडेशन मंडी ने शहर में लगाए गए भारी हाउस टैक्स की दरों को कम करने की मांग की है। इस बारे में संस्था ने नगर परिषद की अध्यक्ष को ज्ञापन प्रेषित करके दरें कम करने का सुझाव दिया है। संस्था के सदस्यों अमर चंद वर्मा, हितेंद्र शर्मा, उत्तम चंद सैनी, समीर कश्यप और एम एल शर्मा ने बताया कि मंडी नगर परिषद ने हाउस टैक्स वसूलने के लिए यूनिट एरिया वैल्यू प्रणाली लागू की है। लेकिन इस प्रणाली में भारी विसंगतियां और कमियां हैं। संस्था की ओर से मंडी और शिमला शहर में लगाए गए हाउस टैक्स का संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तुलनात्मक अध्ययन किया है। जिससे यह निष्कर्ष निकलता है कि भवन मालिकों के अपने रहने के रिहायशी भवनों पर मंडी नप ने शिमला नगर निगम से भी बहुत ज्यादा हाउस टैक्स थोप दिया है।