पधर (मंडी)। उपमंडल के भूस्खलन प्रभावित उरला क्षेत्र के ग्रामीण फोरलेन निर्माण के लिए निशानदेही बदलने को लेकर लामबंद हो गए हैं। ग्रामीणों ने फोरलेन के लिए सर्वेक्षण रेलवे द्वारा किए गए पुराने सर्वे की एलाइनमेंट से किए जाने की मांग उठाई है। लोगों का दावा है कि अगर छेड़छाड़ हुई तो बड़ी आपदा का कारण फोरलेन का सर्वे बनेगा। इस बाबत जहां उरला पंचायत के हियुन और तालगहर गांव के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर, सांसद राम स्वरूप शर्मा, उपायुक्त मंडी और एनएचएआई के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा है वहीं यहां गांव से होकर किए गए फोरलेन सर्वे को बदल कर नीचे के समतल क्षेत्र से किए जाने की मांग उठाई है। ग्रामीण थलटूखोड़ में होने वाले जनमंच कार्यक्रम में भी इस मसले को लेकर मंत्री बिक्रम ठाकुर से मिलकर वार्ता करेंगे।
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तबाही मचा रही पहाड़ी
ग्रामीणों में एडवोकेट राजेश चंदेल, हेम राज, टेक सिंह धरवाल, भूप सिंह, इंद्र सिंह, पुरखी राम, राम सिंह, जगदीश चंद, अनिल कुमार, नानक चंद, ठाकर सिंह, चेत राम धरवाल सहित अन्य ने कहा कि गत चार पांच सालों से लगातार पहाड़ी दरक रही है। गत वर्ष कोटरोपी में पहाड़ी दरकने से हुई भीषण तबाही इसका प्रमाण है।
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कोटरोपी सतीमोड़ से लेकर भलाना घटासनी तक खतरा
इस साल भी पहाड़ी के दरकने से कोटरोपी सतीमोड़ से लेकर भलाना घटासनी तक का क्षेत्र पूरी तरह खतरे की जद में आया है। इससे एक दर्जन से अधिक गांव प्रभावित हो रहे हैं। वहीं समीप के तालगहर गांव के ग्रामीण आज भी टेंट में रहकर साफ मौसम में भी डर-डर कर रातें काट रहे हैं।
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इसलिए सर्वे का विरोध
लोगों ने दावा किया है कि यहां इस दरकते स्थान से फिर छेड़छाड़ होती है तो साथ लगते छानी, तालगहर, धारठा और गैल गांव भी खतरे की जद में आ सकते हैं। बावजूद इसके एनएचएआई द्वारा तालगहर से नीचे से हियुन, करालडी और कसयान गांव होते हुए फोरलेन का सर्वेक्षण किया जा रहा है। जिसका विरोध स्थानीय ग्रामीण करने लगे हैं। ग्रामीणों ने जिला उपायुक्त मंडी से आईआईटी के विशेषज्ञ बुला गांव के साथ लगते पहाड़ी का जायजा लेने की मांग भी उठाई है। एनएचएआई के रीजनल ऑफिसर से भी पत्राचार किया गया है।
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