अमर उजाला ब्रूूरो
मंडी। निजी स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने में लगाई गईं निजी वैन, टैक्सी और कैब चालकों की हड़ताल के कारण दूसरे दिन अभिभावक ही नहीं, अफसरशाही भी बेबस दिखी। हड़ताल के चलते जहां अभिभावक बच्चों को अपने वाहनों में ढोते दिखे, वहीं सरकारी तंत्र के वाहन भी अफसरशाही के बच्चों को लाने-ले जाने में व्यस्त दिखे। लेकिन इस समस्या के समाधान को लेकर निजी स्कूल प्रबंधन ने कोई कदम नहीं उठाया। हालांकि, स्कूल में अवकाश के समय लाउड स्पीकर लेकर दिशा निर्देश देते हुए सड़क तक बच्चों को सुरक्षित अभिभावकों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी लेकिन सड़क में जाम से हर कोई बेहाल दिखा। शनिवार को पुलिस तंत्र भी खलिहार की सड़कों पर खूब चुस्त दिखा। इसके बावजूद रुक-रुक कर जाम की स्थिति पैदा होती रही। उधर, अव्यवस्था से परेशान अभिभावकों में काफी रोष है। अभिभावकों का आरोप है कि निजी स्कूल प्रबंधनों की बेरुखी और टैक्सी चालकों की मनमर्जी से अभिभावक ब्लैकमेल हो रहे हैं। दो माह की एडवांस फीस जा चुकी है। अब अचानक टैक्सी और कैब वालों ने हड़ताल कर दी है। ऐसे में अदालत का दरवाजा खटखटाने के सिवा कोई चारा नहीं रह गया है। नुरपूर सड़क हादसे के बाद नए दिशा निर्देश देकर सरकार सो रही है और मंत्री बेखबर हैं। खामियाजा अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है।
गैरकानूनी रवैया अपना रहे सभी
अभिभावक ज्योति, मनोज, प्रवीण और दीपांकर का कहना है कि गाड़ी वालों ने दो दिन तक बिना कोई सूचना के सेवाएं बंद कर दी हैं। हजारों बच्चे और उनके माता-पिता परेशान हैं। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन मौन है। कंज्यूमर फोरम के मेंबर आकाश शर्मा ने कहा कि कुछ स्कूलों ने दो महीनों की फीस एडवांस में ले रखी है और टैक्सी चालकों ने भी पैसा ले रखा है। अभिभावक ब्लैकमेल हो रहे हैं। बिना किसी पूर्व सूचना के इस प्रकार सेवाएं बंद करना गैर कानूनी है।
जल्द होगा समस्या का समाधान
डीसी मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने कहा कि मामला निजी स्कूलों प्रबंधनों के साथ डिस्कस किया जा रहा है। जल्द समस्या का समाधान किया जाएगा। नियमों के तहत निजी स्कूलों को व्यवस्था करनी होगी अन्यथा सरकारी नियमों के तहत कार्रवाई होगी।