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अंतरजातीय विवाह पर प्रोत्साहन राशि बंद करने की उठाई मांग

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सुंदरनगर (मंडी)। राजपूत सभा के प्रधान केएस जम्वाल का कहना है कि देश की सरकारों को आज संभलने का समय आ गया है। जब राष्ट्रपति के चुनाव तक में जाति को आधार बनाकर राजनीतिक दल चाल चलते हैं तो फिर राजपूत सभा अपने समुदाय को लेकर लामबंद क्यों न हो। अगड़ा-पिछड़ा के चक्कर में राजपूत पिस रहा है। हिमाचल प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां राजपूतों को सार्वजनिक मंच प्रदान किया गया है। हिमाचल में राजपूत कल्याण बोर्ड का गठन किया गया है, जो एक सराहनीय कदम है।
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उन्होंने कहा कि पद्मावती फिल्म को हिमाचल में किसी भी सूरत में रिलीज नहीं होने दिया जाएगा। रविवार को सुंदरनगर में प्रदेश राजपूत सभा की बैठक में प्रदेश भर से राजपूत समुदाय से जुड़े लोगों ने शिरकत की। इस मौके पर प्रस्ताव पारित कर केंद्र और प्रदेश सरकार की आलोचना करते हुए अंतरजातीय विवाह की प्रोत्साहन राशि को 50 हजार से बढ़ा कर अढ़ाई लाख करने की निंदा की गई। मांग की गई कि इस तरह से विवाह पर कोई भी प्रोत्साहन राशि प्रदान नहीं करनी चाहिए। सदस्यों ने आरक्षण को आर्थिक आधार पर करने की मांग को लेकर भी एक प्रस्ताव पारित किया। जिसे आगामी कार्रवाई के लिए केंद्र व राज्य सरकार को भेजा जाएगा। प्रस्ताव में कहा गया है कि गरीब की पहचान कर उसे लाभ मिलना चाहिए न कि संपन्न लोगों को। आरक्षण में परिवर्तन करना समय की मांग है, जिसमें सरकार को समय रहते सुधार करना चाहिए। देश और प्रदेश में राजपूत कल्याण आयोग का गठन करने की मांग की गई और भूमिहीन राजपूत परिवारों को जमीन प्रदान करने के साथ-साथ जिला और खंड स्तर पर महाराणा प्रताप भवन निर्माण करने की मांग की गई। इस मौके पर कांगड़ा जिला के प्रधान टेक चंद राणा, सचिव सीडी राणा, नाहन के प्रधान दिनेश चौधरी, मंडी के प्रधान इंद्र सिंह ठाकुर, शिमला के प्रधान प्रताप ठाकुर, कुल्लू के प्रधान गगन ठाकुर उपस्थित रहे।
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