मंडी। मंडी से गुजरने वाले पठानकोट-जोगिंद्रनगर और मंडी- मनाली एनएच मौत के हाईवे साबित हो रहे हैं। पर्यटन और सामरिक महत्व की दोनों अहम सड़कों के किनारे दरक रही पहाड़ियां कोटरोपी हादसे की तरह भयावह हादसे को दोहरा सकती हैं। लोग खौफ में है। आलम यह है बरसात में इन सड़कों पर सफर करनेे से पहले मुसाफिरों को कई बार सोचना पड़ रहा है। समय रहते प्रशासन के पुख्ता प्रबंध न होने को लेकर भी रोष पनप रहा है। लिहाजा इस मामले में जल्द ही जनहित याचिका दायर करने की तैयारी हो रही है।
तर्क दिया जा रहा है कि भारी बरसात में आलम यह है कि कब कहां क्या घट जाये, किसी को नहीं पता। पधर में कोटरोपी में हुए भारी भूस्खलन ने 47 लोगों को अपनी आगोश में ले लिया। विभाग सहित प्रशासन के पास ऐसी कोई जानकारी तक नही थी कि ये पहाड़ धंस सकता है। अगर विभाग और प्रशासन पहले से सतर्क होता तो शायद लोग मरने से बच जाते। सर्वे रिपोर्ट भी इन पहाड़ों के हक में नहीं हैं। कुल्लू मनाली एनएच भी खतरनाक बना हुआ है। जहां मौत कभी भी अपनी दस्तक दे सकती है। 25 किलोमीटर तक का इलाका बेहद संवेदनशील है। लेकिन, पहाड़ी से गिरती चट्टानें और धंस रही हैं। पहाड़ी को कैसे रोका जाए, प्रशासन और विभाग इस पर कोई खास रणनीति नहीं बना सका है। वाहनों पर चट्टानें गिरना इस रोड पर आम बात बनती जा रही है। पहाड़ी जिस प्रकार अपना कहर बरपाने में लगी हुई है, उससे प्रशासन और विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
फोरलेन से होगी तबाही
सेवानिवृत्त एडीएम बीआर कौंडल ने बताया कि मंडी जोगिंद्रनगर मार्ग पर कोटरोपी में तबाही मच चुकी है। 46 जानें गई हैं। मनाली एनएच पर हणोगी में भी खतरा बना हुआ है। आरोप लगाए कि फोरलेन के जरिये कुछ होटल व्यवसायियों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रकृति से खिलवाड़ किया जा रहा है। जबकि आने वाले समय में फारेलेन के लिए जब पंडोह से आगे टनल को निकाला जाएगा तो पूरे का पूरा पहाड़ हिल जाएगा। इसका मलबा पंडोह डैम में पड़ने की संभावना है। जिससे तबाही मच सकती है। केवल मंडी तक फोरलेन का आना सही है। लेकिन, उससे आगे फोरलेन भारी तबाही का संकेत देता है।
क्या कहते है एनएच के अधिकारी
एनएच के अधिशासी अभियंता रोजिफ शेख ने बताया कि दवाड़ा से लेकर औट टनल की पहाड़ियों का सर्वेक्षण पूरा हो गया है। जल्द ही रिपोर्ट एनएचएआई को सौंप दी जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही सर्वे रिपोर्ट पर काम शुरू हो जाएगा ताकि लोगों की समस्या का समाधान हो सके।
फोरलेन के भू अर्जन अधिकारी ने दिया त्याग पत्र
नागचला से मनाली तक फोरलेन भू अधिग्रहण प्रक्रिया को झटका लगा। वर्तमान भू अर्जन अधिकारी दर्शन कालिया ने त्यागपत्र दे दिया। गौर रहे कि इससे पहले बिलासपुर से बीआर कौंडल और पंडोह से विजय चंदन भी अपना त्यागपत्र दे चुके हैं। इस बारे में पूर्व में रहे भू अर्जन अधिकारी और वरिष्ठ प्रशासक बीआर कौंडल ने बताया कि एनएचएआई भू अर्जन अधिकारियों के माध्यम से लोगों के हितों का हनन कर रही है। जबकि, एक तरफ तो भू अर्जन अधिकारियों द्वारा कम मुआवजा दिए जाने का दबाव बनाया जा रहा है। दूसरी तरफ लोगों ने मंडलायुक्त के कार्यालय में मुआवजा राशि बढ़ाने के लिए मामले दिए हैं। उन पर भी प्रदेश सरकार मुआवजा न बढ़ाने का दबाव बना रही है। ऐसे में अधिकारियों को कार्य करना कठिन हो रहा है। यही वजह है कि सरकार के काबिल अधिकारी भी इस पद पर काम करने से गुरेज कर रहे हैं।