पंडोह (मंडी)। देश का गौरव पंडोह डैम बीबीएमबी के लिए कुबेर से कम नहीं है। मगर इस डैम के मुख्य निर्माता भूमि देने वाले विस्थापित परिवार आज 58 वर्ष बाद भी भूमिहीन है, जो आवासहीन का दंश झेलने को विवश हैं। कोई भी इनकी सुध नहीं ले रहा। यह बात पंडोह डैम विस्थापित कल्याण समिति के संस्थापक प्रधान बीआर भाटिया ने कही।
पंडोह में प्रेसवार्ता में बीआर भाटिया ने कहा कि पंडोह में 450 विस्थापित परिवारों में से मात्र 40 प्रतिशत परिवारों को नौतोड़ भूमि मिली है। 60 प्रतिशत विस्थापित परिवारों को भूमि के बदले भूमि नहीं मिली। इन विस्थापित परिवारों ने तत्कालीन सरकार के आदेशानुसार जंगल की भूमि में घर बनाए, खेत बनाए। मगर कब्जा की गई भूमि आज दिन तक इन विस्थापितों के नाम नहीं हो सकी है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में बीबीएमबी ने अपनी आवासीय कालोनी व वर्कशाप पर पक्की चहारदीवारी लगा रखी है। यह जमीनें उसके बाहर हैं। यह भूमि प्रत्येक परिवार के पास मात्र एक से चार बिस्वा तक ही है। पूर्व में जिन विस्थापितों के नाम भूमि नहीं थी, उनके दस्तावेज लिए गए थे और जमीन देने का आश्वासन तत्कालीन सीएम वीरभद्र सिंह ने दिया था। यह फाइलें आज भी उपायुक्त कार्यालय मंडी में धूल फांक रही है। कहा कि समिति लोकसभा के उसी उम्मीदवार या पार्टी का समर्थन करेगी, जो उनकी मांग का समर्थन करेंगे और मांग पूरी करने की गारंटी देंगे।