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सड़क के लिए ग्रामीणों ने काट डाले हरे-भरे पेड़

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अमर उजाला ब्यूरो
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पधर (मंडी)। गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने हरे-भरे चीड़ के तीस पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी है। वन विभाग की शिकायत पर पुलिस ने जांच करते हुए शुक्रवार को घटनास्थल का मुआयना किया है। इसमें चीड़ के 30 हरे-भरे पेड़ों पर वन काटुओं की ओर से कुल्हाड़ी चलाने की शिकायत भी पुख्ता हो गई है। पुलिस ने इस संबंध में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, अवैध तरीके से किए गए वन कटान के सभी पेड़ पुलिस ने मौके पर जंगल से बरामद कर लिए हैं। काटे गए 13 पेड़ों के मोच्छों को जंगल में झाड़ियों में छुपाया गया था, जबकि 17 पेड़ मौके पर गिराए पाए गए। पुलिस ने भादंसं की धारा 379 और वन अधिनियम की धारा 31,32 के तहत मामला दर्ज किया है।
उपमंडलीय पुलिस अधीक्षक पधर मदनकांत शर्मा ने मामला दर्ज होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस जांच जारी है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक पुलिस जांच में कस्याणी जंगल में जिस स्थान पर अवैध कटान हुआ है, उससे एक गांव ही लाभान्वित होता है। जिस स्थान पर अवैध कटान हुआ है, उसे सफेद चूने से प्रस्तावित सड़क के लिए सांकेतिक किया गया है। उन्होंने बताया कि इससे स्पष्ट होता है कि उसी गांव के बाशिंदों ने गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए वन अधिकार नियमों की शर्तों को पूरा न करते हुए अवैध कटान को अंजाम दिया है।
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वन विभाग के सपुर्द किए पेड़
पधर पुलिस ने वन रेंज उरला के कार्यकारी वन परिक्षेत्र अधिकारी शुकरू राम, स्थानीय बीट के वन रक्षक कमल किशोर के साथ कस्याणी जंगल का मुआयना किया। अवैध तरीके से काटे गए पेड़ों को पुलिस ने पैमाइश कर वन विभाग के सुपुर्द कर दिया है। वन विभाग ने अवैध कटान में काटे गए पेड़ों की अनुमानित लागत लाखों रुपये आंकी है।
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वन विभाग को नहीं लिया विश्वास में
कार्यकारी वनपरिक्षेत्र अधिकारी उरला रेंज शुकरू राम ने कहा कि लोक निर्माण विभाग और राजस्व विभाग ने सड़क की लाइनमेंट की है। इसके लिए वन विभाग को विश्वास में नहीं लिया गया है। लाइनमेंट किए गए स्थान से ही अवैध कटान हुआ है।
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