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उठ नड़ा देयो लगी रा साददा, गूंजते ही जिंदा हुआ नड़

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amar ujala - फोटो : amar ujala
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पधर (मंडी)। चौहारघाटी के हुरंग का तीन दिवसीय बड़ा काहिका उत्सव शुक्रवार को धूमधाम से आयोजित हो गया। काहिका के समापन अवसर पर हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। काहिका स्थली चारवेद के नीचे उत्सव की रश्म पूरी होने से पहले और छिद्रा आयोजित होते ही नड़ परिवार के सभी महिला और पुरुष सदस्यों ने हाथों में लकड़ी के लिंग लेकर अश्लील भाषा बोलते हुए पूरे गांव की परिक्रमा की। दोपहर को देव हुरंग नारायण अन्य सभी सात देवतागण सहित मंदिर से बाहर निकले। इस मौके पर देवता के गुरों ने देव खेल खेला। अंत में संध्या वेला पर काहिका रस्म पूर्ण होते ही मुख्य नड़ पवन कुमार की जिंदगी और मौत से लड़ने की अग्नि परीक्षा की घड़ी आ गई। बड़ादेयो हुरंग नारायण ने मुख्य नड़ पवन कुमार को काहिका उत्सव की रश्म को पूरा करने का आशीर्वाद दिया। चारवेद तक पहुंचने से पहले ही नड़ पवन कुमार अचेत अवस्था में चले गए। इस दौरान मृत नड़ की शवयात्रा निकाल कर पूरे हुरंग गांव की परिक्रमा की गई। देव हुरंग नारायण के प्राचीन भेखले के विशाल मोहरे को मृत नड़ की छाती पर रखा गया। जैसे ही शंख की ध्वनि से अर्थी उठी। कारदारों ने जौ का आटा हवा में उछाला। लोगों ने भी घास की पत्तियां अर्थी पर फेंकी। पूरे गांव की परिक्रमा करने के बाद नड़ की अर्थी को दोबारा चारवेद के पास पहुंचाया। देव हुरंग नारायण के गुर ने देवता के मंदिर से लाए पानी के छींटे अर्थी पर फेंके और मृत नड़ के कान में आवाज लगाई ...उठ नड़ा देयो लगी रा साददा। धीरे धीरे नड़ पवन का शरीर सांसें लेने लगा। पूरा हुरंग गांव देव हुरंग नारायण के जयकारों से गूंज उठा। देव शक्ति से जीवित हए नड़ और परिवार के सदस्यों ने देव हुरंग नारायण, देव घड़ौनी नारायण, घाटी वजीर देव पशाकोट, देव पेखरू गहरी, देव त्रैलू गहरी, देव दू्रण गहरी, देव कपलधार गहरी, देव सिल्हधार गहरी से आशीर्वाद लिया। अंत में काहिका में आने वाले सभी सात देवताओं को स्वयं हुरंग नारायण के रथ ने विदाई भी दी।

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