मंडी/सुंदरनगर। नगर निकायों या पंचायतों ने सख्ती की तो नियमों को ताक पर रखकर गंदगी फैलाने वालों को दस हजार जुर्माना अदा करना पड़ सकता है। जुर्माना अदा करने के बाद भी अगर कोई अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और बार-बार उल्लंघन करने का दोषी पाया गया तो घर और व्यावसायिक परिसर को मूलभूत सुविधाओं से वंचित किया जा सकता है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के जारी आदेशों को लागू करने की कवायद जिला की मंडी, सुंदरनगर, नेरचौक, जोगिंद्रनगर नगर परिषदों समेत सरकाघाट, रिवालसर और करसोग में शुरू कर दी है। इस बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए परिषद ने जन जागरण और जागरूकता अभियान आरंभ किए जाएंगे। वहीं रसोई का गंदा पानी सीवरेज से जोड़ने के भी निर्देश किए जा रहे हैं। वर्तमान में नगर निकाय या पंचायत की ढील के चलते ब्यास और बीएसएल जैसी नदियों और जलाशयों में सरेआम गंदगी फेंकने से लोग बाज नहीं आ रहे हैं।
डोर टू डोर योजना व्यापक तरीके से शुरू नहीं
नगर परिषदों और पंचायतों में डोर टू डोर योजना व्यापक सिरे से शुरू नहीं हो सकी है। हालांकि संबंधितों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश के बाद कवायद आरंभ कर दी है। जिसके तहत सबसे पहले लोग अपने घरों का कूड़ा कूडेदान में ही डालें, इसे सुनिश्चित किया जा रहा है। सुंदरगर में नगर परिषद ने इसके लिए शहर में जहां करीब पांच करोड़ की लागत से भूमिगत डस्टबिन स्थापित किए हैं। वहीं सघन आबादी वाले वार्डों में ट्रैक्टर के माध्यम से रोज लोगों के घरों और दुकानों का कूड़ा कचरा उठाया जा रहा है। इसके अलावा मंडी में डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन मुहिम चली हुई है। जिसके लिए एक टीम गठित की जाएगी। जो मौके पर ही लोगों को जुर्माना करेगी।
रसोई का गंदा पानी सीवरेज से जोड़ना अनिवार्य
नगर परिषद सुंदरनगर ने परिषद क्षेत्र से सभी 13 वार्डों के लोगों को सीवरेज कनेक्शन लेना भी अनिवार्य किया है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए हर घर को अपनी रसोई का गंदा पानी सीवरेज लाइन के साथ जोड़ना अनिवार्य कर दिया है। जिन्होंने अब तक सीवरेज के कनेक्शन नहीं लिए हैं, उन्हें तुरंत सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग से कनेक्शन प्राप्त करने को कहा गया है। जिससे शहर साफ सुथरा रहने के साथ गंदा पानी नदी-नालों में जाकर वातावरण को प्रदूषित न कर सके।
सहयोग करें: डीसी
डीसी मंडी मदन चौहान ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति, पर्यटक, दुकानदार, व्यावसायिक संस्थान, मंदिर व शैक्षणिक संस्थान अपने परिसर या आसपास अथवा अन्य स्थान पर कूड़ा-कचरा फेंक कर दूषित करते पाया गया तो उसके खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर 10 हजार रुपये जुर्माना किया जा सकता है। किसी को जुर्माना देने की नौबत न आए इसलिए क्षेत्रवासी पर्यावरण संरक्षण में नगर परिषद को सहयोग करें।