आयुर्वेदिक अस्पताल में रोगियों को दाखिल करने की सुविधा बंद
एएनएम नर्स ट्रेनिंग पर, पद रिक्त होने से व्यवस्था हांफी
अस्पताल में रोजाना 100 से अधिक ओपीडी
सस्ते इलाज के चक्कर में मरीज हो रहे हैं बेहाल
लाखों रुपए की लागत से बनाया अस्पताल भवन
जितेंद्र ठाकुर
जोगिंद्रनगर (मंडी)।
सस्ते इलाज की आस लिए यदि आप जोगिंद्रनगर के सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल जा रहे हैं, तो सोच-समझ के जाएं। यहां इलाज की गारंटी नहीं। हां, अगर मर्ज थोड़ा ज्यादा है, तो एडमिट होने की सुविधा नहीं मिलेगी। आपको निजी अस्पताल या फिर दूसरे सरकारी अस्पताल का रुख करना पड़ेगा। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय जोगिंद्रनगर में मरीजों को दाखिल करने की सुविधा बंद है।
स्टाफ नर्से की कमी के कारण ये नौबत आई है। इसके चलते लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 2007 में विभाग की ओर से चिकित्सालय पर लाखों रुपए खर्च कर भवन का निर्माण किया गया है। समूचे उपमंडल में एक मात्र आयुर्वेदिक चिकित्सालय में नर्सों के पद भी रिक्त हैं। अस्पताल में हर दिन लगभग 100 के करीब लोग स्वास्थ्य जांच के लिए आते हैं।
लोगों की जुबानी
स्थानीय निवासी अश्वनी ठाकुर, बुधि सिंह, रामलाल, सागर चंद, राकेश, राजेंद्र कुमार का कहना है कि दूर दराज के लोग इस अस्पताल पर निर्भर हैं। यहां लोग इलाज के लिए आते हैं। लेकिन यहां सुविधाओं के अभाव में लोगों को बाहर इलाज के लिए जाना पड़ रहा है। लोगों ने अस्पताल में स्टाफ पूरा करने की मांग की है।
पांच नर्सों की जरूरत, दो तैनात
चिकित्सालय में 24 घंटे के शेड्यूल को सुचारु रूप से चलाने के लिए चार से पांच नर्सों की आवश्यकता है। लेकिन चिकित्सालय में दो ही स्टाफ नर्सें तैनात हैं। ऐसे में स्टाफ पूरा न हो से 24 घंटे का शेड्यूल पूरा नहीं हो पाने से ऐसी दिक्कतें पेश आ रही हैं। वहीं, जो एएनएम नर्स यहां पर कार्यरत थी, वो भी कुछ दिन पहले ट्रेनिंग पर चली गई है।
जल्द तैनात होगा स्टाफ: विभाग
डीओ मंडी मोहन लाल शांडिल्य ने कहा कि मामला ध्यान में है। आचार संहिता के चलते इस संदर्भ में कुछ कर पाना मुश्किल है। जैसे ही अचार संहिता हटेगी, स्टाफ नर्सों कि नई भर्ती होते ही जोगिंद्रनगर चिकित्सालय में उचित स्टाफ उपलब्ध करवा दिया जाएगा।