पधर (मंडी)। कोटरोपी की पहाड़ी के नीचे एनएच को बहाल करने के प्रशासन के प्रयास रविवार को खराब मौसम के चलते सिरे नहीं चढ़ सके। एनएच बहाल करने में अभी और दिन लग सकते हैं। यहां पर लगातार मलबा गिरने से खतरा बरकरार है। हालांकि, मार्ग अब एक तरफ से दिखना शुरू हो गया है। एनएच बहाली को दिए पांच दिन के समय में दो दिन शेष बचे हैं। कोटरोपी में घटनास्थल पर रविवार को आठवें दिन भी सर्च ऑपरेशन दिन भर जारी रहा। हालांकि आठवें दिन कोई शव बरामद नहीं हुआ। ऐसे में जोगिंद्रनगर की पिपली पंचायत के बडू गांव निवासी प्रेम सिंह के परिजनों को आठवें दिन भी मायूस होकर घर लौटना पड़ा। रविवार को एसडीएम पधर आशीष शर्मा, तहसीलदार देवी सिंह, नायब तहसीलदार ज्ञान चंद, एसएचओ पधर पूरे प्रशासनिक अमले सहित घटनास्थल पर डटे रहे। वहीं लोक निर्माण विभाग एनएच के एसडीओ सुमन सूद विभागीय कर्मियों सहित मोर्चे पर डटे हैं। सुरक्षा को लेकर हिमाचल पुलिस थर्ड आईआरबी बटालियन पंडोह के तीस जवान अभी भी मोर्चा संभाले हुए हैं। घटनास्थल पर अभी भी चार बड़ी पोकलेन मशीनें, तीन बुल्डोजर और एक जेसीबी तैनात की गई है। रविवार को खराब मौसम में दरक चुकी कोटरोपी की पहाड़ी से तीन चार मर्तबा दोबारा भूस्खलन हुआ। मलबा पहाड़ी के नीचे रुक गया है। प्रशासन थाना प्रभारी प्रीतम जरियाल के नेतृत्व में सुरक्षा व्यवस्था को संभाले हुए है। राहगीरों को पुलिस के जवान मार्ग के आरपार करवा रहे हैं।
झीलों में फिर भर गया पानी
रविवार को दो पोकलेन मशीनें मलबे में दबे शव की तलाश में जुटी रहीं। जबकि एक मशीन पहाड़ी के नीचे बनी छोटी-छोटी झीलों के पानी को निकालने के लिए तैनात की गई है। एक पोकलेन मशीन और तीन बुल्डोजर तथा एक जेसीबी एनएच को बहाल करने में जुटे हैं। बारिश का दौर जारी रहने से पहाड़ी के नीचे बनी झीलें फिर भर रही हैं। शनिवार को आधी झीलें खाली कर दी गई थीं, जो रात को बारिश होने से फिर भर गईं। रविवार शाम को झील को खाली किया गया। लेकिन, दो नालों का पानी जमा होने से यह झील फिर भर रही है।
पंदलाही गांव में पानी की निकासी से सहमे लोग
झील के पानी को छोड़ने से नीचे पंदलाही गांव के लोग भी सहमे हुए हैं। यहां नाले की गड़गड़ाहट के साथ सारा मलबा नीचे पहुंच रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि बीते कल छोड़े गए पानी से मलबे के साथ आधा दर्जन चीढ़ के पेड़ गांव के पास पहुंच गए हैं। जिससे नाले का बहाव मुड़ने से यहां बड़ी घटना हो सकती है। हालांकि प्रशासन से गांव को डेंजर जोन मान कर ग्रामीणों को घर खाली कर सुरक्षित जगह में रहने की हिदायत दी है। प्रशासन ने उन्हें सामुदायिक भवन पधर में रहने के लिए जगह दी है, लेकिन ग्रामीणों ने इतने दूर जाने से मना कर तिरपाल मुहैया करवाने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि वे टेंट लगा कर गांव के ऊपर पहाड़ी में अपना आशियाना बनाएंगे।