गोहर (मंडी)। 35 लाख सेब पेटी उत्पादित करने वाले मंडी जिला में इस बार 24.47 लाख सेब पेटी उत्पादन होने की उम्मीद है। जिले में इस बार सेब का निर्धारित उत्पादन लक्ष्य 48,500 मीट्रिक टन है। इस बार अंधड़, चलने सहित अन्य कारणों से करीब 40 फीसदी तक फसल तबाह हो गई है। फ्लावरिंग के समय बेमौसमी बर्फबारी और ज्यादा ठंड होने से सेब उत्पादन गिरा है।
अब बागवानों को कम उत्पादन के बाद दामों की चिंता सता रही है। यदि दाम चोखे नहीं मिले तो फसल की लागत पूरी करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। जिले में अर्ली वैरायटी के सेब पकने लगा है। ऐसे में जल्द देशभर की बड़ी मंडियों में मंडी से सेब की सप्लाई होगी। वहीं, दूसरी वैरायटी के सेब को तैयार होने में अभी समय लगेगा।
प्रेम ठाकुर, गुरदयाल सिंह, यशवंत, देवेंद्र, हेम सिंह, जीत कुमार, कर्म सिंह, देवी राम, तेज सिंह ठाकुर, भीम सिंह, रमेश ठाकुर, वीर सिंह और तपेंद्र ठाकुर आदि बागवानों ने बताया कि इस बार सेब फसल कम हुई है। मौसम की सीधी मार उत्पादन पर पड़ी है। शुरूआत में तो सब ठीक रहा, लेकिन बाद में अचानक हुई बर्फबारी और ठंड ने सारा खेल बिगाड़ दिया। इसका सीधा असर सेब उत्पादन पर पड़ा है।
जिला मंडी के करसोग, चुराग, चरखडी, निहरी, पंडार, कमाद, शकोहर, रोहांडा, थमाड़ी, कुटाहची, फंग्यार, जहल, धंग्यारा, सलाहर, बगस्याड़, थुनाग, जंजैहली, छतरी, सरोआ, शिल्हि बागी, बागाचनोगी, थाची और पंजाई आदि क्षेत्रों में सेब का बंपर उत्पादन होता है।
उधर, बागवानी विभाग के उपनिदेशक मंडी डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि इस बार मंडी जिला में 48,500 मीट्रिक टन सेब उत्पादन का निर्धारित लक्ष्य है। मंडी जिला में प्लम 1000 मीट्रिक टन और नाशपाती 950 मीट्रिक टन उत्पादन लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि मई के अंत तक की यह रिपोर्ट है। अभी अगले चरण तक उत्पादन लक्ष्य ड्रॉपिंग और अंधड़ चलने के कारण और गिर सकता है।