बालीचौकी (मंडी)। सराजघाटी की ग्राम पंचायत थाट्टा के धार गांव में देव कांढेनाग (शेषनाग) की ऐतिहासिक दीपावली (दयाली) हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस दौरान दो गुटों में बंटे समुदाय ने एक दूसरे पर जलती मशालों से प्रहार कर देवता और राक्षसों के युद्ध का वृतांत सजीव किया। मान्यता का निर्वाह करते हुए यहां का माहौल मशालों की रोशनी औैर वाद्ययंत्रों की धुनों से रंगीन और भक्तिमय किया। देव कांढेनाग (शेषनाग) की विशेष दीपावली मंघर माह की अमावस के दिन ही मनाई जाती है। यह पर्व एक वर्ष थाट्टा के गांव धार में और दूसरे वर्ष गांव चेत में मनाया जाता है। इस वर्ष यह धार गांव में मनाई गई। इस अवसर पर देव कांढेनाग (शेषनाग) और राक्षसों के मध्य भीषण युद्ध हुआ। इस दौरान प्राचीन परंपरा का पालन करते हुए लोगों ने आपस में मशालों से एक दूसरे पर प्रहार किया। मान्यता है कि इस दिन न तो किसी आदमी को आग लगती है और न ही आग से कोई नुकसान होता है। इसको लोग देवता का चमत्कार मानते हैं और बुरी शक्तियों को दूर भगाने के लिए ऐसा किया जाता है। इसके बाद लोगों के दो धड़े बन जाते हैं, दोनों धड़े गांव घनियार और लोट के लोग आपसे में मशाल के साथ लड़ते हैं। लड़ने के पश्चात गांव धार में एक बहुत बड़ा धूना जलाया जाता है। लोग मिलकर इस कुंड के चारों ओर नाचते और गाते हैं। सराजी नाटी के साथ कार्यक्रम समाप्त हो जाता है। स्थानीय लोगों में शंभु, बलदेव राज, मनोज कुमार, शंकर लाल, प्रेम चंद, पितांबर, मुंशी नाथ ने कहा कि शनिवार सुबह देव कांढेनाग के चार बहड़ वाद्ययंत्र के साथ देव शेषनाग मंदिर में मुंडन करते हैं और बाद में सराजी धाम का आयोजन किया जाता है।
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