थुनाग (मंडी)। सराज में आपदा से सबकुछ चौपट कर दिया है। घर बहे, जमीन बही, पेयजल योजनाएं भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। विभाग पेयजल योजनाओं को बहाल करने में जुटा हुआ है लेकिन अभी 30000 लोग स्वच्छ पेयजल सुविधा से महरूम हैं। वे खड्डों-नालों का पानी पीने को मजबूर हैं। जल शक्ति विभाग मंडल थुनाग के अंतर्गत 241 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं।
इससे 81 ग्राम पंचायतें प्रभावित हुई हैं। वर्तमान में 167 योजनाओं को अस्थायी रूप से चालू कर 20 पंचायतों को पूर्ण और 61 को आंशिक रूप से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। क्षेत्र की सबसे बड़ी छड़ीखड्ड-शैटाधार उठाऊ पेयजल योजना, जो 25 पंचायतों को पानी आपूर्ति करती है, पिछले 16 दिनों से ठप है। बाखली खड्ड पर बना इसका लिफ्टिंग प्लांट गाद से भर गया है। अधिकांश जनरेटर खराब हैं और परियोजना स्थल तक पहुंचने वाली सड़क और पुल भूस्खलन और बाढ़ में नष्ट हो चुके हैं। इसे बहाल करना चुनौती से कम नहीं है। इससे लोग गंदला और मटमैला बारिश का पानी पीने को मजबूर हैं।
निहारी, जरोल और ढमेसर के निवासियों सोहन, चतर सिंह, रीना देवी और बालक राम ने बताया कि दूषित पानी के सेवन से जलजनित रोग पनप सकते हैं। रीना देवी ने कहा, नाले का पानी ही पीना पड़ रहा है। इससे बीमारी का डर सता रहा है। जंजैहली के बीएमओ डॉ. पुष्प राज ने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में रोग तेजी से फैल सकते हैं। उन्होंने पानी उबालने, शुद्धिकरण गोलियां इस्तेमाल करने और साबुन से नियमित हाथ धोने की सलाह दी। साथ ही, उन्होंने एंटीबायोटिक्स, ओआरएस और जागरुकता अभियान की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।
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सात मुख्य उठाऊ पेयजल योजनाओं में से एक को अस्थायी रूप से चालू किया गया है, लेकिन दो योजनाओं के ट्रांसफार्मर और पंप बाढ़ में बह गए। 140 ग्रेविटी योजनाओं की मरम्मत कर 44 पंचायतों को आंशिक जलापूर्ति शुरू हुई है। थुनाग मंडल में 339 हैंडपंप भी कार्यरत हैं।
-उपेंद्र वैद्य, मुख्य अभियंता, जल शक्ति विभाग
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