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Mandi News: जोगिंद्रनगर के 30 फीसदी शैक्षणिक संस्थानों में आग से बचने के पुख्ता प्रबंध नहीं

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मंडी जिला के जोगिंद्रनगर शहर के निजी स्कूल में प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए गुर सिखाते दमकल विभा - फोटो : Mandi
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। उपमंडल के तीस फीसदी शैक्षणिक संस्थानों विद्यार्थियों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां मानकों के तहत आग से बचने के पुख्ता प्रबंध नहीं हैं।
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आग की घटनाओं से निपटने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में पर्याप्त फायर एक्सटिंगविशर और जल भंडारण के टैंक भी नहीं हैं। वहीं हॉजरील (टैंक या हाइड्रेंट से पानी उठाने के लिए लंबी पाइप का रोल) की व्यवस्था भी शैक्षणिक संस्थानों में नहीं है। ऐसे में आग की घटना पर काबू पाना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
सरकारी स्कूल में यह अव्यवस्था सबसे अधिक है। इस बात का खुलासा अग्निशमन विभाग ने किए सर्वे से हुआ है। विभाग ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी है। इस बात की जानकारी बुधवार को जोगिंद्रनगर के शांति निकेतन वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों, अभिभावक और अध्यापकों को संबोधित करते हुए दमकल चौकी के प्रभारी शेर सिंह सकलानी ने दी। उन्होंने स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर चिंता जताई।
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सर्द मौसम में अधिक सचेत रहने की जरूरत
सकलानी ने कहा कि सर्द मौसम में कोयले की अंगीठी और लकड़ी के इस्तेमाल के दौरान लापरवाही बरतने से आग की घटनाएं बढ़ती हैं। दुर्गम क्षेत्र चौहारघाटी में लकड़ी के भंडारण पर सावधानी न बरतने से हर वर्ष लाखों की संपत्ति राख हो रही है।
स्कूल होंगे जिम्मेवार : एसडीएम
एसडीएम विशाल शर्मा ने कहा कि उपमंडल के सभी शैक्षणिक संस्थानों में अग्नि सुरक्षा के पुख्ता प्रबंधों के दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। अधूरी व्यवस्था पर स्कूल प्रबंधन जिम्मेवार होगा। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दमकल विभाग के मापदंडों को पूरा करना स्कूल प्रशासन का दायित्व है। काष्ठशैली के स्कूलों में अग्निशमन यंत्रों के अलावा जल भंडारण के भी पुख्ता प्रबंध होने चाहिए। इसके लिए दमकल विभाग की मौजूदगी में शैक्षणिक संस्थानों के प्रबंधकों को जरूरी हिदायतें भी जारी की जाएंगी।
ये हैं नियम
दमकल चौकी प्रभारी शेर सिंह सकलानी ने बताया कि विभागीय मापदंडों के अनुसार सभी सरकारी और निजी स्कूल भवनों पर रुलिंग नेशनल बिल्डिंग कोड नियमावली के तहत हॉजड्रिल जरूरी है। 30 प्रतिशत भवनों में हॉजड्रिल सुविधा नहीं है। निजी स्कूलों ने औपचारिकताएं पूरी कर सुविधा दी है। अग्निशमन विभाग ने स्कूल भवनों के लिए लिखवाए सामान को लगाने के बाद निरीक्षण किया जाता है। उसके बाद ही एनओसी दी जाती है। अभी तक कुछ स्कूलों में इस तरह की सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी स्कूलों में कम से कम दस हजार लीटर पानी का भंडारण जरूरी है। अग्निशमन यंत्रों में शामिल सीओटू वाटर टाइफ भी हर मंजिल में लगाना जरूरी है। साथ संयंत्र चलाने का प्रशिक्षण भी स्कूल के किसी कर्मचारी को जरूरी रहता है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इसकी रिपोर्ट संबंधित विभागों को एनओसी के साथ भेजी जाती है।
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