अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। प्रदेश सरकार के बजट में पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली को लेकर कोई प्रावधान न होने से न्यू पेंशन स्कीम के तहत आने वाले कर्मचारियों में निराशा है। प्रदेशाध्यक्ष नरेश ठाकुर ने मंडी में प्रेसवार्ता के दौरान प्रदेश सरकार के प्रति भारी रोष जताया। उन्होंने कहा कि नई पेंशन स्कीम के तहत आने वाले सभी कर्मचारियों ने सरकार से बार-बार पुरानी पेंशन बहाली की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने कहा कि इस बजट से भी उन्हें निराशा ही मिली है। विरोध स्वरूप प्रदेश के करीब 15 हजार कर्मचारी शिमला में एक विरोध रैली करने जा रहे हैं। इसमें सरकार से शांतिपूर्ण तरीके से पुरानी पेंशन बहाली की मांग की जाएगी। लेकिन, फिर भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया तो विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
जंगली जानवरों की समस्या पर नहीं गौर
प्रदेश सरकार के बजट से किसानों बागबानों को जहां कुछ राहत मिली है, वहीं जंगली जानवरों की समस्या पर एक बार फिर इनके हाथ निराशा ही लगी है। इस समय यह एक बहुत बड़ी समस्या है। इसके चलते कई किसान अब तक खेतीबाड़ी छोड़ चुके हैं और कई छोड़ने की कगार पर हैं। इस समय जिले के सभी क्षेत्रों में बंदरों, गाय-बैलों और सुअरों की भारी तादाद है। ये किसानों की फसलों को चट कर जाते हैं।
टमाटर का समर्थन मूल्य तय नहीं
जिला की बल्ह घाटी के किसान लंबे समय से टमाटर का समर्थन मूल्य तय करने की सरकार से मांग कर रहे थे। उन्हें इस बजट से उम्मीद थी कि इस बार उनको टमाटर का सही समर्थन मूल्य निर्धारित किया जाएगा, लेकिन बजट में इस बार फिर यह तय नहीं किया गया। इससे घाटी के किसानों में भारी रोष है।
फिर नहीं मिली खाद्य प्रसंस्करण यूनिट
सराज और नाचन में बहुत बागबान हैं, जो लंबे समय से यहां पर खाद्य प्रसंस्करण यूनिट स्थापित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन बजट में इस बार भी इस बारे में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। इसके चलते बागबानों के हाथ फिर निराशा लगी है। गौरतलब है कि सराज नाचन क्षेत्रों में भारी संख्या में सेब सहित कई फलों की पैदावार होती है लेकिन खाद्य प्रसंस्करण यूनिट न होने के कारण कई बार ये सड़ जाते हैं और बागबानों को नुकसान झेलना पड़ता है।
सड़कों के लिए भी नहीं मिला बजट
जिले में कई दुर्गम क्षेत्र हैं और इन क्षेत्रों में सड़कों की हालत इतनी दयनीय है कि इन पर चलना खतरे से खाली नहीं होता है। इस समय सराज नाचन सहित विभिन्न क्षेत्रों की सड़कों पर सफर करना जोखिम भरा है। कई स्थानों पर तो इसके चलते आज तक कई हादसे हो भी चुके हैं। लेकिन बजट में सड़कों की दशा सुधारने के लिए बजट का प्रावधान नहीं होने से जिला के लोगों के हाथ एक निराशा लगी है।