पधर (मंडी)। कोटरोपी पहाड़ी में अब गवालन गांव की तरफ दरारें पड़ गई हैं। बीते दिन हुई मूसलाधार बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने बुधवार को गवालन गांव को खाली करवा दिया है। यहां पर आठ मकानों में 14 परिवार रह रहे थे। चार परिवार तो 13 अगस्त को ही मकान खाली कर रिश्तेदारों के यहां चले गए थे। इसी दिन भूस्खलन के चलते बालक राम के घर पर भारी मात्रा में मलबा आ गया था। इस कारण बालक राम भी अपने परिवार के साथ रिश्तेदारों के यहां चला गया था। गत बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों के दौरे के बाद खतरे को भांपते हुए गांव को पूरी तरह से खाली कर दिया गया। प्रभावित दस परिवारों ने झीलन पहाड़ी से सटे फुटाखल गांव में शरण ली है। प्रशासन ने सभी ग्रामीणों को फौरी राहत के तौर पर तिरपाल जारी कर दिए हैं। लोगों ने घरों से राशन और बर्तन सहित जरूरी सामान निकाल लिया है।
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200 मीटर के भूभाग में बड़ी दरारें, कई जगह धंसी जमीन
प्रशासन की ओर से तहसीलदार पधर प्रकाश चंद शर्मा ने गांव का दौरा किया है। गवालन गांव के नीचे लगभग 200 मीटर के भूभाग में विशाल दरार आई है। भूमि का हिस्सा यहां दो भाग में बंट गया है। जमीन करीब एक से दो फुट के बीच धंस गई है। तहसीलदार पधर ने मौके की रिपोर्ट तैयार कर एसडीएम को सौंपी है।
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एसडीएम ने आईआईटी के विशेषज्ञों के साथ किया दौरा
एसडीएम पधर डॉ. आशीष शर्मा ने गांव में जमीन धंसने की सूचना मिलते ही बुधवार को आईआईटी कमांद के विशेषज्ञों के साथ गवालन धार का दौरा कर संभावित खतरे का जायजा लिया। एसडीएम ने कहा कि नमक की पहाड़ी होने के कारण नमक पिघलने से भूमि की सतह नीचे खिसकती जा रही है। कोटरोपी की पहाड़ी पर सराजबागला गांव में भी बीते वर्ष इसी प्रकार जमीन में दरारें आई थीं। अधिशासी अभियंता और सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के अधिशासी अभियंता को यहां स्थिति का जायजा लेने के आदेश जारी किए हैं।
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