मंडी। कोटरोपी त्रासदी में ध्वस्त मंडी-पठानकोट नेशनल हाईवे मार्ग को यथावत ही रखा जाएगा। ध्वस्त हुए 260 मीटर के पैच पर मलबे से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। प्रारंभिक जांच के बाद जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) ने एनएच अॅथारिटी को यह हिदायत दी है। टीम कोटरोपी त्रासदी की विस्तृत जांच में जुटी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही सड़क को पुन: दुरुस्त करने पर विचार किया जाएगा। गत वर्ष 12 अगस्त की रात को कोटरोपी में लैंडस्लाइड से मंडी-पठानकोट का 260 मीटर का एरिया पुल समेत ध्वस्त हो गया था। जीएसआई की टीम का तर्क है कि यदि मलबे से छेड़छाड़ की जाती है तो यह धंस सकता है। पहाड़ी के नीचे बहने वाले नाले के दबने से भी पहाड़ी दकरने का डर है। जिसे लेकर अब एनएच अॅथारिटी ने इसकी टारिंग और मरम्मत कार्य को टाल दिया है। वैज्ञानिकों का तर्क है कि नाले की मुख्यधारा और निकासी को ढूंढने के बाद मलबे को हटाने और सड़क की मरम्मत पर विचार किया जा सकेगा।
जल्द ही प्रशासन को रिपोर्ट सौंपेगी टीम
करीब एक माह से सर्वे में जुटी जीएसआई के वैज्ञानिकों की टीम जल्द ही त्रासदी के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगी। रिपोर्ट में कोटरोपी क्षेत्र का नक्शा लगभग टीम ने तैयार कर लिया है। जलस्त्रोतों के निकास और मुख्यधारा का भी पता लगाया जाएगा। हालांकि, प्रारंभिक रिपोर्ट में टीम ने भू-गर्भ में मिट्टी की दो प्लेट्स में टकराव और पानी की अधिकता को कारण बताया था। वहीं, अब टीम हादसे के कारणों के साथ ही बचावों और आगामी कदमों के सर्वेक्षण में जुटी है।
जलस्रोतों के दबने के कारण बरती जा रही सावधानी
कोटरोपी त्रासदी में भारी मात्रा में पहाड़ी से मलबा दरकने के बाद करीब किमी तक फैले मलबे के नीचे पानी के जलस्रोत दब गए हैं। मलबे के नीचे जलस्त्रोतों के निकास का अभी तक कोई पता नहीं चल सका है। जिससे मलबे के दरकने की आशंका लगातार बरकरार है। इसी के चलते टीम ने मलबे से छेड़छाड़ न करने की हिदायत दी है।
मलबे से नहीं होगी छेड़छाड़ : अनिल
एनएच अॅथारिटी के अधिशाषी अभियंता अनिल संग्राय ने कहा कि जीएसआई की टीम ने मलबे से छेड़छाड़ न करने की हिदायत की है। जिस कारण सड़क की टारिंग नहीं की जाएगी। टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्य किया जाएगा।