त्रिपुरारी सांख्यान
मंडी।
ये मंडी का जोनल अस्पताल है। यहां रोगियों की सुविधा के लिए नेरचौक मेडिकल कॉलेज की ओपीडी भी लग रही है। लेकिन रोगियों की जान का जिम्मा संभालकर बेहतर सेवाएं देने की डींगे हांकने वाला प्रबंधन खुद मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। बेड उपलब्ध न होने के कारण अस्पताल में प्रसव करवाने आई महिलाओं को कड़ाके की ठंड में जमीन पर ही लिटा दिया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन की इस कार्यप्रणाली से प्रसूता महिलाओं और परिजनों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ मरीजों के परिजन फोल्डिंग बेड खरीदकर ला रहे हैं, तो कुछ फर्श पर ही छोड़ दिए हैं।
कुल्लू से आए राजीव कुमार ने बताया कि वह पत्नी निर्मला की डिलीवरी के लिए वह इतनी दूर से आए हैं। लेकिन उन्हें 3 दिनों से बेड नहीं मिला। वार्ड के सभी बेड भरे हैं। उन्होंने कहा कि कुल्लू अस्पताल में गायनी स्पेशलिस्ट नहीं हैं इसीलिए वह यहां आए लेकिन उन्हें भारी कठिनाई हो रही है।
सरकाघाट के नीरज शर्मा ने भी कुछ इसी तरह से अपनी दास्तां सुनाई। उन्होंने कहा कि मंडी में गायनी स्पेशलिस्ट अधिक हैं। यही सोचकर वह यहां पत्नी पूनम शर्मा का प्रसव करवाने के लिए लाए हैं। लेकिन यहां आने पर उन्हें अपनी पत्नी को फर्श पर लेटाना पड़ा है। वह दर्द से बेहाल है।
इन्हें अपना बेड लाना पड़ा
बग्गी के नरेंद्र कुमार ने कहा कि उनकी पत्नी दो दिन से फर्श पर लेटी है। अब तक अस्पताल प्रबंधन की तरफ से कोई भी बेड की व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते उन्हें बाहर से अपना बेड लाना पड़ा और उस पर अपनी पत्नी वंदना को लेटाया है। हर दिन फर्श पर भी प्रसूता महिलाओं की संख्या बढ़ रही है।
शीघ्र मुहैया होंगे बेड
इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देशराज शर्मा ने कहा कि अस्पताल प्रशासन को चिकित्सा अधीक्षक देखते हैं। इसलिए उनसे इस बारे में बात करें। उधर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. टीसी महंत ने बताया कि सभी प्रसूता महिलाओं के लिए शीघ्र बेड उपलब्ध करवाए जाएंगे।