सुंदरनगर (मंडी)। सुंदरनगर के नागरिक अस्पताल में सर्जरी और महिलाओं के प्रसव की सुविधा बंद हो गई है। सर्जन व महिला रोग विशेषज्ञ को फिर से मेडिकल कॉलेज नेरचौक में भेजने के कारण यह नौबत आई है। जिससे अस्पताल में न तो कोई सर्जरी हो रही है और न ही महिलाओं का प्रसव। फलस्वरूप मरीजों को मंडी जोनल अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जा रहा है। जहां आने जाने में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले अक्तूबर के पहले माह में विशेषज्ञ दंपति को नेरचौक मेडिकल कालेज के लिए स्थानांतरित कर दिया गया था। लेकिन, विधानसभा चुनाव सिर पर होने के कारण राजनीतिक दबाव के बाद दोनों को सुंदरनगर अस्पताल में एक माह के डेपुटेशन पर दोबारा भेज दिया गया। लेकिन, जैसे ही विधानसभा चुनाव के लिए 9 नवंबर को मतदान हुआ, दोनों का डेपुटेशन स्वास्थ्य विभाग ने आगे न बढ़ाते हुए उन्हें मंडी ज्वाइन करने के निर्देश जारी कर दिए। जिसके बाद से सुंदरनगर अस्पताल में सर्जरी व प्रसव सुविधा बंद हो गई है।
अक्तूबर माह में 212 प्रसव
सुंदरनगर के नागरिक अस्पताल में मंडी स्थित जोनल अस्पताल के बाद जिला में सबसे अधिक मरीज उपचार को पहुंचते हैं। यहां पर पिछले साल करीब 23,00 प्रसव और अक्तूबर माह में 212 प्रसव दर्ज किए गए हैं। वहीं हर माह दर्जनों के हिसाब से सर्जरी भी होती है।
दो दर्जन से अधिक मामले लटके
दोनों विभागों में चिकित्सक न होने से कार्य ठप है। यहां जिन मरीजों को सर्जरी के लिए तिथियां दी गई थीं, उनके आपरेशन जहां लटक गए हैं। दूसरी ओर अस्पताल में प्रसव को आने वाली महिलाओं को मंडी के लिए रेफर किया जा रहा है। जिसके चलते सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं को हो रही है। एक अनुमान के मुताबिक दो दर्जन से अधिक मामले सर्जरी के लटके हुए हैं।
डेढ़ माह पहले हुआ था शिलान्यास
नागरिक अस्पताल परिसर में मातृ-शिशु अस्पताल का करीब डेढ़ माह पहले शिलान्यास किया गया था। जिसके बाद लोगों को आस जगी थी कि अब यहां पर गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों के लिए बेहतर स्वास्थ्य उपलब्ध हो सकेगी। लेकिन, उनकी आशाओं पर एक माह में ही पानी फिर गया है। विभाग ने यहां पर तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ और सर्जन का मेडिकल कालेज में स्थानांतरण तो कर दिया लेकिन, नागरिक अस्पताल सुंदरनगर के लिए कोई भी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।
गत वर्ष करीब साढ़े तीन लाख मरीज हुए पंजीकृत
गत वर्ष नागरिक अस्पताल सुंदरनगर में करीब साढ़े तीन लाख मरीज पंजीकृत हुए। अस्पताल में वर्ष भर में कुल 2,282 प्रसव हुए थे। जिनमें 1098 बालिकाओं और 1184 बालकों का जन्म हुआ। औसतन अस्पताल में प्रति माह करीब दो सौ प्रसव होते हैं। यह सारा कार्य अस्पताल में केवल मात्र एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के कंधों पर होता था। परंतु अब विशेषज्ञ न होने के कारण यहां आने वाली गर्भवती महिलाओं को जांच करवाने व प्रसव के लिए दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। इससे लोगों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। वहीं, निजी अस्पतालों की भारी भरकम फीस भी अदा करनी पड़ रही है।
अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी नहीं
अस्पताल में करीब तीन साल से अधिक समय से चिकित्सक का पद रिक्त होने के कारण अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी मरीजों को नहीं मिल पा रही है। पहले अस्पताल में सस्ती दरों पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिल पाती थी। लेकिन, रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली होने के चलते लोगों को बाहर अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में यह सुविधा बंद होने के बाद निजी स्वास्थ्य संस्थानों में अल्ट्रासाउंड के दाम भारी भरकम बढ़ा दिए हैं। जिस कारण लोगों को मजबूरी में इस राशि की अदायगी करनी पड़ रही है।
अस्पताल प्रबंधन की सफाई
प्रभारी नागरिक अस्पताल सुंदरनगर डा. मुसरत जावेद का कहना है कि अस्पताल में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ व सर्जन का स्थानांतरण मेडिकल कॉलेज के लिए हुआ है। वह एक माह से डेपुटेशन पर सुंदरनगर भेजे गये थे। जिसके समाप्त होने पर उन्होंने दोबारा मंडी ज्वाइन कर लिया है। विभाग से इस संदर्भ में मामला उठाया गया है। जहां से शीघ्र ही वैकल्पिक व्यवस्था करने के बारे में आश्वस्त किया गया है।